डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा, बचेंगे 7 लाख करोड़, मिलेंगे करोड़ों रोजगार

नई दिल्ली। देश की माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक तेज, आधुनिक और किफायती बनाने की दिशा में डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के प्रभावी विस्तार से देश को माल ढुलाई लागत में सालाना 7 लाख करोड़ रुपये की भारी बचत होने के साथ-साथ करीब एक करोड़ नए रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर में पेशेवरों की बंपर मांग

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) मुंबई की रिपोर्ट 'फ्यूचर टैलेंट रिक्वायरमेंट इन लॉजिस्टिक्स: विजन 2047' के मुताबिक, वर्ष 2030 तक लॉजिस्टिक्स सेक्टर को लगभग 1.15 करोड़ अतिरिक्त कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी। परिवहन, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन वितरण और फ्रेट फॉरवर्डिंग जैसे क्षेत्रों में बंपर नौकरियां पैदा होंगी। यह आकलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के बीच बनाए गए लगभग 1,506 किलोमीटर लंबे पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के महत्वपूर्ण खंडों के लोकार्पण के बाद सामने आया है।

जीडीपी में 13 फीसदी का बड़ा योगदान

उत्तर प्रदेश के दादरी को मुंबई स्थित जेएनपीटी बंदरगाह से जोड़ने वाला यह पश्चिमी कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो चुका है और व्यापार जगत में इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। वर्तमान में भारत का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र देश की कुल जीडीपी में लगभग 13 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जिसके वर्ष 2030 तक करीब 47.12 लाख करोड़ रुपये के बाजार आकार तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र की आगामी प्रगति केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक और बेहतर आपूर्ति समन्वय पर भी आधारित होगी।

Leave a Reply