न्यायिक अकादमी मामले में हाईकोर्ट सख्त, तीन शीर्ष अधिकारी हुए पेश, 30 नवंबर तक काम पूरा करने का आश्वासन

पटना,। बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़ी जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार के संबंधित विभाग हरकत में आ गए हैं। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को पर्यावरण एवं वन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल और नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। सुनवाई की शुरुआत में ही पीठ ने प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही कथित ढिलाई और पूर्व के आदेशों के अनुपालन में देरी को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने सवाल किया कि न्यायिक अकादमी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा और आसपास के क्षेत्र के विकास एवं सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी क्यों हो रही है।
– 30 नवंबर तक सभी कार्य पूरे करने का भरोसा
कोर्ट की सख्ती के बाद अधिकारियों ने पीठ के समक्ष प्रस्तावित कार्यों की समय-सीमा प्रस्तुत की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि न्यायिक अकादमी के आसपास बाउंड्री वॉल का निर्माण, महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र का सौंदर्यीकरण, बाड़ लगाने और वृक्षारोपण समेत सभी संबंधित कार्य 30 नवंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। पीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष लाल को कार्यों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि काम में किसी तरह की बाधा आने पर याचिकाकर्ता तत्काल अदालत का रुख कर सकते हैं। इसके साथ ही न्यायिक अकादमी के निदेशक को संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर निर्धारित समय-सीमा में सभी कार्य पूरे कराने का निर्देश दिया गया।
– अतिक्रमण और सुरक्षा से जुड़ा है मामला
मामला बिहार न्यायिक अकादमी के आसपास कथित अतिक्रमण, अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से संबंधित है। पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस दिशा में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने सरकार को अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्योरा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था। मामले की प्रभावी निगरानी और निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग को भी पक्षकार बनाया गया था। विभाग को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
– रिकॉर्ड पर दस्तावेज नहीं मिलने से कोर्ट नाराज
इससे पहले की सुनवाई में सरकारी पक्ष की ओर से बिना संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखे मौखिक दलील दिए जाने पर भी पीठ ने नाराजगी जताई थी। सुनवाई के दौरान एएजी-3 पी.के. वर्मा ने दावा किया था कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के क्षेत्र के विकास को लेकर पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया है। हालांकि, कोर्ट द्वारा रिकॉर्ड की जांच किए जाने पर ऐसा कोई हलफनामा या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिला। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर दस्तावेज के बिना केवल मौखिक दलीलों के आधार पर मामले में आगे बढ़ना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने मामले में बरती जा रही कथित लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पथ निर्माण, वन तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। अब अधिकारियों के आश्वासन के बाद अदालत की नजर निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा होने पर रहेगी।
