कश्मीर के बाद अब नक्सल प्रभावित इलाकों पर केंद्र सरकार की नजर, अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति के बाद राज्य में सामान्य होती स्थिति को देख अब केंद्र सरकार ने अपना ध्यान नक्सल प्रभावित इलाकों की तरफ केंद्रित कर दिया है। सरकार ने वाम नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों की सक्रियता पर जोर देने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगले सोमवार को ऐसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों और पुलिस महानिदेशकों की बैठक बुलाई है जो वामपंथी नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित हैं। गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
बैठक में नक्सल प्रभावित 11 राज्यों में हिंसा और विकास की ताजा स्थिति का आकलन किया जाएगा और भविष्य में उठाये जा सकने वाले संभावित कदमों पर विचार विमर्श होगा। बैठक नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 26 अगस्त को बुलाई गई है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल के मुख्यमंत्रियों के हिस्सा लेने की संभावना है। इसके अतिरिक्त बैठक में सभी राज्यों के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशकों को भी बुलाया गया है ताकि विकास और हिंसा की सही तस्वीर के परिप्रेक्ष्य में चर्चा हो सके। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के प्रमुखों को भी उपस्थित रहने को कहा गया है। केंद्रीय बलों में सीआरपीएफ, सशस्त्र सुरक्षा बल, बीएसएफ और आइटीबीपी शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर में डोभाल की अहम भूमिका
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी शामिल हो सकते हैं। जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बनाये रखने में डोभाल की अहम भूमिका रही है। संभवत: यही वजह है कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए रणनीति बनाने में भी उनकी मदद ली जा रही है। नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए रणनीति बनाने में जिन केंद्रीय मंत्रालयों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है उनमें ग्रामीण विकास, वित्त, संचार और सामाजिक विकास मंत्रालय शामिल हैं।
हिंसा की घटनाओं में आई कमी
हालांकि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा की घटनाओं में पिछले तीन साल में काफी कमी आई है। इसी महीने खत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने कहा था कि साल 2016 से 2019 के दौरान नक्सल प्रभावित इलाकों में हिंसा की वारदातों में 2013-15 के मुकाबले 15.8 फीसद और इनमें होने वाली मौतों की संख्या में 16.6 फीसद की कमी आई है। रेड्डी ने कहा कि सरकार की नीति और साल 2015 के एक्शन प्लान पर अमल की वजह से यह कमी आई है।
मंत्रालय ने अपने लिखित जवाब में बताया है कि इस अवधि में नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों की संख्या भी साल 2018 में घटकर 60 रह गई थी। इनमें भी दो तिहाई घटनाएं केवल दस जिलों में ही हुई हैं। इस साल 30 जून तक वाम नक्सली हिंसा में मरने वालों की संख्या 117 रही है। जबकि इसके मुकाबले साल 2018 की इसी अवधि में वाम नक्सली हिंसा में 139 लोगों की मौत हुई थी। मंत्रालय का मानना है कि हिंसा की घटनाओं और मरने वाले लोगों की संख्या में कमी आने की एक बड़ी वजह वाम नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की रफ्तार को तेज करना रहा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती ने भी नक्सलियों के हौसलों को पस्त किया है। इसके अलावा राज्य सरकारों की तरफ से चलाये गये आत्मसमर्पण कार्यक्त्रम और उसके तहत नक्सलियों के पुनर्वास की योजनाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इसके अतिरिक्त इन इलाकों में संचार का नेटवर्क की मजबूती ने भी नक्सलियों की कमर तोड़ने में मदद की है। संचार मंत्रालय के यूएसओ फंड की मदद से टेलीकॉम कंपनियों ने इन क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की संख्या में काफी वृद्धि की है।
