छात्र बनाम सिस्टम की बहस, ‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

इंदौर। छात्रों की गूंज कार्यक्रम के मंच पर जब राहुल गांधी पहुंचे तो उन्होंने इंदौर की पावन धरा से न सिर्फ मालवा-निमाड़ अपितु विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के युवाओं को भी साधने का प्रयास किया। इंदौर आगमन पर वे अपने पारंपरिक पहनावे में दिखे, किंतु सायं काल जब विद्यार्थियों के मध्य पहुंचे तो वे युवाओं में लोकप्रिय परिधान में नजर आए।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन का शुभारंभ विद्यार्थियों की छह प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि छात्र स्वभाव से विनम्र होता है और सद्भाव फैलाता है, किंतु वह प्रश्न भी पूछता है। वर्तमान व्यवस्था प्रश्न पूछने वाले छात्रों के विरोध में खड़ी दिखाई देती है। राहुल गांधी ने प्रशासनिक व राजनीतिक व्यवस्था को समझाते हुए मंच से विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक चेहरों की तस्वीरें प्रदर्शित कीं। उन्होंने प्रमुख उद्योगपतियों के नाम भी मंच से निसंकोच लिए। यद्यपि कार्यक्रम का प्रारूप एक युवा कंसर्ट की भांति तैयार किया गया था, किंतु इसके पीछे आगामी राजनीतिक धरातल निर्मित करने का उद्देश्य स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा था।
व्यवस्थागत तंत्र की कमियों से गई मेरे भाई की जान: प्रियांशी
दिल्ली हादसे में असमय कालकवलित हुए देवास निवासी छात्र अर्पित जाज की बहन प्रियांशी ने भावुक होकर कहा कि प्रशासनिक एवं संस्थागत तंत्र की लापरवाही के कारण उनके भ्राता जैसे निर्दोष युवाओं की बलि चढ़ रही है। मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र बेहतर भविष्य के निर्माण हेतु अपने घरों से दूर दिल्ली जैसे महानगरों में अध्ययन करने जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के दो सप्ताह व्यतीत हो जाने के उपरांत भी कोई कड़ा प्रशासनिक संज्ञान नहीं लिया गया और न ही पीड़ित परिजनों से संवाद स्थापित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया था।
करोड़ों के बजटीय आवंटन के उपरांत भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव
खरगोन के छात्र रजत गंगारेकर ने आरोप लगाते हुए कहा कि आंबेडकर विश्वविद्यालय के महाविद्यालयों में अतिथि विद्वानों (गेस्ट फैकल्टी) का घोर अभाव है तथा अध्ययन हेतु पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं। छात्राओं हेतु स्वच्छ प्रसाधनों की व्यवस्था तक नहीं है। विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष आठ करोड़ रुपये का वार्षिक बजट प्राप्त होता है, किंतु इस धनराशि का व्यय विकास कार्यों पर नहीं हो पा रहा है।
छात्रावासों में बदहाली एवं उच्च व्यय से परेशान ग्रामीण छात्र
सेंधवा की छात्रा प्रियंका सेंगर ने व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि शासकीय छात्रावासों में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्र गृह-निर्मित खाद्य सामग्री साथ लाने को विवश हैं। उच्च शिक्षा हेतु नगरों में किराए के कक्ष लेने हेतु कृषकों एवं श्रमिकों को अपने आभूषण व भूमि गिरवी रखनी पड़ रही है। बस किराया एवं रसोई गैस सिलेंडरों के बढ़ते मूल्यों से जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों हेतु शिक्षा प्राप्त करना अत्यंत दुष्कर होता जा रहा है।
पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात भी नियुक्ति का इंतजार
इंदौर की छात्रा दीप्ति सिंह ठाकुर ने बताया कि माध्यमिक एवं प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में चयनित होने के पश्चात भी उन्हें अब तक नियुक्ति पत्र प्रदान नहीं किया गया है। व्यावसायिक व शैक्षणिक पाठ्यक्रमों (डी.एड., बी.एड.) में नियमित सीटों का अभाव है, जबकि व्यवस्थागत अनियमितताओं के कारण योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
आवास एवं उच्च शिक्षा के भारी व्यय पर उठे गंभीर प्रश्न
उज्जैन की छात्रा राधा मालवीय ने कहा कि शोध (पीएच.डी.) की पढ़ाई में लाखों रुपये का व्यय हो रहा है। शासकीय छात्रावासों में स्थान न मिलने के कारण विद्यार्थियों को निजी मकानों में भारी किराए पर रहना पड़ता है, जिसके लिए ब्याज पर ऋण लेना पड़ रहा है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब औद्योगिक घरानों को रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराई जा सकती है, तो विद्यार्थियों को किफायती दरों पर आवास सुविधा क्यों नहीं दी जाती?
प्रशासनिक अधिकारियों व समन्वयकों के मध्य नोकझोंक
आयोजन स्थल पर अत्यधिक जनसमूह की उपस्थिति को देखते हुए व्यवस्था संभालने पहुंची पुलिस टीम के पसीने छूट गए। अपराह्न में पुलिस उपायुक्त (DCP) नरेंद्र रावत मंच की ओर बढ़े और कार्यक्रम शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश दिया।
इस दौरान राहुल गांधी के सहयोगियों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की तीखी बहस एवं धक्का-मुक्की की स्थिति निर्मित हो गई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों के रवैये पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कार्यक्रम पूर्व पोस्टर वार एवं एयरपोर्ट पर स्वागत
कार्यक्रम से पूर्व ही नगर में राजनीतिक गरमाहट देखने को मिली। विरोध स्वरूप नगर के प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग्स व पोस्टर्स लगाए गए थे। स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व ने इसे विपक्षी दलों की निम्नस्तरीय राजनीति करार दिया।
दोपहर में राहुल गांधी के इंदौर विमानतल पहुंचने पर मार्ग में कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। एयरपोर्ट परिसर तथा चंद्रगुप्त चौराहे के समीप समर्थकों की भारी भीड़ एकत्र रही।
मार्गों पर लगी लंबी कतारें एवं कटआउट देखकर रोकी कार
सायंकाल जब राहुल गांधी कार्यक्रम स्थल पहुंचे तो नवलखा से रीजनल पार्क मार्ग तक युवाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। राहुल गांधी ने लगभग एक घंटे छह मिनट तक मंच से युवाओं को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने तकनीकी माध्यमों से विभिन्न वीडियो क्लिप्स का प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियां युवाओं को अवसरों से वंचित कर रही हैं।
कार्यक्रम के समापन उपरांत इंदौर एयरपोर्ट रोड से गुजरते समय राहुल गांधी ने अपने कटआउट के साथ खड़े एक परिवार को देखकर अपना वाहन रुकवाया और महिलाओं तथा युवाओं से आत्मीय संवाद कर तस्वीरें खिंचवाईं।
छात्र संगठनों का समर्थन एवं विपक्षी दल का पलटवार
'नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन' (NEYU) नामक छात्र संगठन, जो पूर्व में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं एवं छात्र हितों के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहा है, वह भी इस मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराता नजर आया।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इस आयोजन पर तीखा जुबानी हमला बोला। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एवं दलीय नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि यदि विपक्षी दल को युवाओं के वास्तविक समर्थन पर विश्वास होता, तो उसे प्रायोजित भीड़ जुटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस बीच स्थानीय दलीय कार्यालयों में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों में मिली विजय का उत्सव भी मनाया गया।
