सड़क किनारे घरों में कारोबार की छूट से बदलेगा भोपाल का नक्शा, 80 जगहों को फायदा

भोपाल: भोपाल के मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 को लेकर शहर में नए प्रावधानों पर चर्चा और आपत्तियों का दौर शुरू हो गया है। मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को वैध करने के लिए 'मार्केट स्ट्रीट' का प्रावधान शामिल किया गया है, जिसके तहत 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों और चुनिंदा क्षेत्रों में कारोबार की कानूनी छूट दी जा रही है।
मार्केट स्ट्रीट प्रावधान और इसके मायने
नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, जिन मुख्य मार्गों की चौड़ाई 18 मीटर या उससे अधिक है और जहाँ अवैध निर्माण के शमन के मामले अधिकतर सुलझ चुके हैं, उन्हें राज्य सरकार विचार-विमर्श के बाद 'मार्केट स्ट्रीट' घोषित कर सकती है।
प्रभावित क्षेत्र: इससे अरेरा कॉलोनी, अवधपुरी, गुलमोहर, शाहपुरा, कोलार, संतनगर और करोद समेत शहर के 80 से अधिक क्षेत्रों पर सीधा असर पड़ेगा।
व्यावसायिक छूट: सरकार और अधिकारियों के विवेक पर यह छोड़ा गया है कि यदि इस चौड़ाई की सड़क के किनारे कई घर व्यावसायिक रूप से सक्रिय हो चुके हैं, तो बचे हुए आवासीय प्लॉटों को भी व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की कानूनी अनुमति दे दी जाए। यह छूट मुख्य सड़क से लगे मूल प्लॉट की गहराई तक ही मान्य होगी।
विशेषज्ञों और नागरिकों की चिंताएं
इस प्रावधान और पूरे मास्टर प्लान ड्राफ्ट को लेकर विशेषज्ञों और रहवासियों की ओर से कई तरह की आपत्तियां और चिंताएं सामने आ रही हैं:
बुनियादी ढांचा और शांति पर असर: जानकारों का मानना है कि आवासीय क्षेत्रों को अचानक मार्केट स्ट्रीट बनाने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या, शोर-शराबा बढ़ेगा। इससे वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों की निजता प्रभावित होगी तथा पानी, बिजली और कचरा प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
गलियों में अनियंत्रित फैलाव: आलोचकों का कहना है कि मुख्य सड़कों पर बाजार खुलने से यह धीरे-धीरे पीछे की अपेक्षाकृत कम चौड़ाई वाली शांत गलियों में भी फैल जाएगा।
सुविधाओं का अभाव: टीएंडसीपी कार्यालय में ड्राफ्ट, नक्शे और खसरे देखने पहुंचे लोगों ने व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि तय समयसीमा (25 अक्टूबर) के नजदीक होने के बावजूद पर्याप्त नक्शे और खसरों के पैनल उपलब्ध नहीं हैं, साथ ही ऑनलाइन सुनवाई को लेकर भी आम जनता में असंतोष है।
पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
मास्टर प्लान में सड़कों की चौड़ाई और भूमि उपयोग में किए गए बदलावों को लेकर पर्यावरणविदों और जानकारों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बाघ संरक्षण विशेषज्ञ प्रभाष जेटली ने चिंता जताई है कि बाघ भ्रमण क्षेत्र (जैसे बैरागढ़, दौलतपुर और चंदनपुरा क्षेत्र) में बड़ी सड़कों के प्रस्ताव से मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, रहवासी संघों और स्थानीय नागरिकों ने भी असीमित एफएआर और ग्रीन एरिया के उपयोग से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं और शहर की शांति व पर्यावरण को बचाने के लिए नियमों में बदलाव की मांग की है।
