बालोतरा कोर्ट भवन मामले में हाईकोर्ट का बड़ा कदम, IIT जोधपुर करेगी गुणवत्ता की जांच

बालोतरा: राजस्थान हाईकोर्ट ने बालोतरा जिले के सिवाना फांटे के पास निर्माणाधीन जिला न्यायालय परिसर के भवन निर्माण में बरती गई कथित लापरवाही और तकनीकी खामियों को बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने भवन की निर्माण गुणवत्ता और मानकों की जांच के लिए आईआईटी (IIT) जोधपुर के तकनीकी विशेषज्ञों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संबंधित पक्षों की एक संयुक्त टीम का गठन किया है।
जनहित याचिका में उठाए गए सवाल
यह आदेश अधिवक्ता सुमेरलाल शर्मा व अन्य द्वारा दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में ठेकेदार फर्म 'मो. अयूब कंस्ट्रक्शन कंपनी (बीकानेर)' द्वारा बनाए जा रहे इस बहुमंजिला अदालत भवन का निर्माण तय मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है। याचिका में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और कई संरचनात्मक कमियों का दावा किया गया है।
आरसीसी स्ट्रक्चर (RCC Structure) में हनीकॉम्बिंग (कंक्रीट में छिद्र या खाली जगह), बीम-कॉलम के जॉइंट्स की मजबूती, कंक्रीट कास्टिंग, सीढ़ियों, लिंटल, प्लास्टर और फिनिशिंग जैसे अहम बिंदुओं पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इसके अलावा, बिजली और पानी की लाइनों के लिए निर्माण के बाद की जाने वाली तोड़फोड़ की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आईआईटी जोधपुर के विशेषज्ञ करेंगे तकनीकी मूल्यांकन
हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच दल में आईआईटी जोधपुर के तकनीकी विशेषज्ञ अभियंता, संजय माथुर (अधीक्षण अभियंता), अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार, अधिवक्ता तीर्थराज सिंह सोढा और बालोतरा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को शामिल किया है। यह संयुक्त टीम निर्माणाधीन स्थल का मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण करेगी और निर्माण सामग्री व तकनीकी मानकों का बारीकी से परीक्षण करेगी।
अदालत ने टीम को निर्देश दिए हैं कि यदि निरीक्षण के दौरान भवन में कोई गंभीर कमी पाई जाती है, तो उसे दूर करने के लिए तत्काल आपातकालीन उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक सुधारात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए जाएं।
समय-सीमा और अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार संयुक्त जांच दल को 17 अक्टूबर 2026 तक निर्माणाधीन परिसर का निरीक्षण पूरा करना होगा। इसके बाद एक विस्तृत और तकनीकी स्टेटस रिपोर्ट तैयार कर 6 नवंबर 2026 को अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई भी 6 नवंबर को ही निर्धारित की गई है।
