सेवा की कहानी : बिहान से जुड़कर कृषि सखी बनीं आशा, ग्रामीणों को जैविक खेती के लिए कर रहीं प्रेरित

रायपुर : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बिहान से जुड़कर महिलाएं न केवल अपने परिवार की आजीविका में सहयोग कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
कोण्डागांव जिले के बड़ेराजपुर विकासखंड के ग्राम पारोंड निवासी श्रीमती आशा मानिकपुरी ऐसी महिला हैं, जिन्होंने बिहान के गीतांजली स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। आशा वर्तमान में कृषि सखी के रूप में कार्य कर रही हैं और गांव के किसानों को बेहतर एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।
कृषि सखी के रूप में आशा ग्रामीणों को जैविक खाद के उपयोग, जैविक कीटनाशक तैयार करने तथा श्रीविधि से खेती करने की जानकारी देती हैं। साथ ही फसलों में होने वाले विभिन्न रोगों की पहचान और उनके उपचार के संबंध में किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराती हैं। उनके प्रयासों से ग्रामीणों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा महिला किसानों को भी कृषि गतिविधियों में आगे आने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
आशा बताती हैं कि बिहान के स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी क्षमता और अनुभव का उपयोग करने का अवसर मिला। कृषि सखी के रूप में कार्य करते हुए वे किसानों को नई कृषि तकनीकों की जानकारी देने के साथ-साथ स्वयं भी अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।
आशा की यह कार्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। बिहान के माध्यम से मिले अवसर ने उन्हें केवल आर्थिक रूप से सशक्त नहीं किया, बल्कि गांव के अन्य किसानों और महिलाओं को भी जैविक एवं टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ाने वाली ग्रामीण परिवर्तन की सहभागी बनाया है।
