विपक्ष के मार्च पर बीजेपी का पलटवार, संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप

नई दिल्ली/हैदराबाद। दिल्ली में चुनाव आयोग (ईसीआई) के खिलाफ विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए विरोध मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और देश में अराजकता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं और सुप्रीम कोर्ट को कर रहा है बदनाम’
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंदर राव ने एक तीखे बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी और ‘इंडिया’ ब्लॉक देश में अपने पुराने और नकारा राजनीतिक नैरेटिव को फिर से जीवित करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने राजनीतिक लाभ और निहित स्वार्थों के लिए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बारे में लगातार गलत और भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं।
बीजेपी नेता ने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों की गरिमा व विश्वसनीयता को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में कई नेताओं और पूर्व चुनाव आयुक्तों को सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा की सीटें और बड़े राजकीय पद देकर पुनर्वासित किया गया, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार ने निर्वाचन आयोग की स्थापना के बाद से किसी भी सेवानिवृत्त चुनाव आयुक्त को कोई राजनीतिक पद नहीं दिया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से निर्वाचन आयोग की पारदर्शिता और गरिमा बनाए रखने की अपील की।
विपक्षी दलों के तीखे हमले और इस्तीफे की मांग
दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शन में शामिल विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर हमला जारी रखा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने कड़े शब्दों में मांग करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के जरिए ही केंद्र में सरकार बनाई गई है और इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल विभिन्न राज्यों के चुनावों में भी किया गया है।
इसी तरह, कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि चुनाव प्रणाली और देश के लोकतंत्र को जो नुकसान पहुंचाया जा रहा है, उसके मद्देनजर ज्ञानेश कुमार इस पद पर बने रहने के नैतिक अधिकार खो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसीआई के कामकाज में निष्पक्षता की कमी साफ नजर आ रही है और देश के नागरिकों को अब यह स्पष्ट हो चुका है कि आयोग पूरी तरह से सत्ता पक्ष के एजेंडे के अनुरूप काम कर रहा है।
