मुंबई में रेल परियोजना के लिए 29 पेड़ काटने की अनुमति, 13 को मिलेगा नया ठिकाना

मुंबई। मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से कुर्ला के बीच प्रस्तावित 5वीं और 6वीं रेल लाइन परियोजना के तहत माटुंगा वर्कशॉप के निर्माण में आ रही बाधा को दूर करने के लिए वृक्ष प्राधिकरण ने 42 पेड़ों को हटाने की मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कुल 42 प्रभावित पेड़ों में से 29 पेड़ों की कटाई की जाएगी, जबकि 13 पेड़ों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्रोपण (ट्रांसप्लांटेशन) किया जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट मुंबई महानगरपालिका के ‘जी/उत्तर’ विभाग के अंतर्गत आता है, जहां निर्माण कार्य के चलते ये पेड़ प्रभावित हो रहे थे। मध्य रेलवे प्रशासन ने वृक्ष प्राधिकरण के समक्ष प्रस्ताव रखकर इन पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी थी, जिसे प्राधिकरण की बैठक में विचार-विमर्श के बाद हरी झंडी दे दी गई।

896 नए पौधे लगाने की योजना

पेड़ों की कटाई और पुनर्रोपण की भरपाई के लिए मध्य रेलवे ने कुल 896 नए पेड़ लगाने का लिखित आश्वासन दिया है। रेलवे द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, पेड़ों की कटाई की तारीख से मात्र 15 दिनों के भीतर नए पौधे लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। लगाए जाने वाले इन नए पौधों की न्यूनतम ऊंचाई छह फीट होगी और इसमें विशेष तौर पर स्थानीय प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। नए पेड़ों के साथ-साथ जिन पेड़ों का पुनर्रोपण किया जाना है, उन्हें लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) रेलवे स्टेशन यार्ड की उपलब्ध खाली जमीन पर लगाया जाएगा। इसके लिए लगभग 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में पारंपरिक पद्धति से वृक्षारोपण किया जाएगा।

सात साल तक होगी पेड़ों की देखभाल

मध्य रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि जितने भी नए पौधे लगाए जाएंगे, उनके संरक्षण, संवर्धन और उचित देखभाल की पूरी जिम्मेदारी संबंधित वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (उद्यानिकी) के माध्यम से आगामी सात वर्षों तक लगातार निभाई जाएगी। वृक्षारोपण के बाद पौधों के जीवित रहने की दर और उनके स्वस्थ विकास की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे।

इन प्रमुख प्रजातियों के लगेंगे पौधे

भरपाई वृक्षारोपण के तहत स्थान की उपलब्धता और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाने प्रस्तावित हैं। इनमें मुख्य रूप से नागकेसर, कांचन, कदंब, नीम, महोगनी, अमलतास, सीता अशोक, बकुल, निंबोली, तामण, पारिजात, राय आंवला, इमली, करंज, चाफा और सोनचाफा जैसी प्रजातियां शामिल हैं। मध्य रेलवे की यह 5वीं और 6वीं लाइन परियोजना मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था के विस्तार और ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ाने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस परियोजना के लिए पेड़ों को हटाने की अनुमति मिलने के बाद अब यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी पूरी तरह बना रहे।

Leave a Reply