सर्व पितृ अमावस्या और उसका महत्व

हिंदू धर्म में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। इसे पितृ मोक्ष अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि की जानकारी न हो। इस साल सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार  को पड़ रही है।
सर्व पितृ अमावस्या के दिन आप सुबह में जब स्नान करें तो उसके बाद ही अपने पितरों के लिए तर्पण करें। स्नान के बाद ही तर्पण किया जाता है।
पितृ पक्ष में सर्व पितृ अमावस्या बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। सर्व पितृ अमावस्या पर उन पितरों का श्राद्ध करते हैं, जिनका निधन किसी भी महीने की अमावस्या तिथि को हुई होती है। सर्व पितृ अमावस्या पर उन पितरों का भी श्राद्ध करते हैं, जिनके निधन की तिथि पता नहीं होती है। इसके अलावा आप अपने उन पितरों का भी श्राद्ध करते हैं, जिनके बारे में आपको पता नहीं
तर्पण और पिंडदान, सर्वपितृ अमावस्या के दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय के किनारे पितरों का तर्पण करें। इस दौरान तिल, जौ, कुश और जल से पितरों को तर्पित करने से वे संतुष्ट होते हैं। पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। इसलिए ऐसा करना अनिवार्य है।
पीपल वृक्ष की पूजा- सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं। दीपक जलाकर ॐ पितृदेवाय नमः मंत्र का जप करें। मान्यता है कि पीपल में सभी देवताओं और पितरों का वास होता है। साथ ही पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
गाय को भोजन- सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर गाय को हरा चारा, गुड़ या रोटी खिलाएं। यह कर्म पितरों को प्रसन्न करता है और वंश में सुख-समृद्धि लाता है। इसके साथ ही अगर पितृ दोष है तो उससे भी मुक्ति मिलती है।
कौए को अन्न खिलाना पितरों को अर्पण करने के समान माना गया है। अमावस्या के दिन पका हुआ भोजन कौवों को अवश्य खिलाएं। खिलाएं।

Leave a Reply