प्री-पीटीसी प्रवेश में बड़ा बदलाव, गुजरात में 30 साल तक की उम्र वाले कर सकेंगे आवेदन

गांधीनगर। राज्य में गुणवत्तायुक्त पूर्व प्राथमिक शिक्षा के लिए सक्षम और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुजरात सरकार ने बाल अध्यापन मंदिर यानी प्री-पीटीसी (डी.ई.सी.ईडी) कॉलेजों के प्रवेश नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में घोषित इन सुधारों के तहत प्रवेश प्रक्रिया को अधिक समावेशी, सुगम और समयानुकूल बनाया गया है। शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जाडेजा के नेतृत्व में लिए गए इन फैसलों से राज्य के युवाओं को शिक्षक बनने के और अधिक अवसर मिलेंगे।
सीटों में 25 प्रतिशत वृद्धि और आरक्षण के प्रावधान
संशोधित नियमों के अनुसार प्री-पीटीसी कॉलेजों में प्रति वर्ग स्वीकृत सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 62 कर दी गई है। सीटों के नए आवंटन में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के लिए 27 प्रतिशत (17 सीटें), अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 7 प्रतिशत (4 सीटें) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 15 प्रतिशत (9 सीटें) निर्धारित की गई हैं। ओपन कैटेगरी के लिए 41 प्रतिशत के हिसाब से 26 सीटें रहेंगी, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) के लिए पहली बार 10 प्रतिशत के आधार पर 6 सीटें आरक्षित की गई हैं। इसके अलावा भारत सरकार के दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कुल सीटों का 5 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित रखा गया है।
आयु सीमा और शैक्षणिक पात्रता में दी गई बड़ी राहत
सरकार ने प्रवेश के लिए आयु सीमा को 24 वर्ष से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दिया है, जिससे विलंब से शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को भी मौका मिल सकेगा। आरक्षित वर्गों और दिव्यांग उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट मिलेगी। प्रवेश के लिए कक्षा-12 में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जबकि आरक्षित वर्गों और दिव्यांग अभ्यर्थियों को अंकों की पात्रता में 5 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। माध्यम के चयन को भी लचीला बनाया गया है, जिसके तहत छात्र अपनी अध्ययन पृष्ठभूमि के अनुसार प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
