नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की प्रतिक्रिया, पिल्लई का नाम आने पर मचा विवाद

वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति के नोबेल पुरस्कार से एक बार फिर वंचित कर दिया गया है, जिससे वह नॉर्वे की नोबेल समिति पर बुरी तरह भड़के हुए हैं। इस साल शांति का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की पूर्व जज और भारतवंशी नवनेथम यानी नावी पिल्लई को दिए जाने की घोषणा की गई है।

डोनाल्ड ट्रंप का फूटा गुस्सा, नॉर्वे को चेतावनी

नोबेल समिति के इस फैसले के कुछ ही देर बाद डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बेहद अपमानजनक और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले ने नॉर्वे की साख पर ऐसा दाग लगा दिया है जो कभी नहीं मिटेगा। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई युद्ध रुकवाए हैं और शांति के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके अनुसार, दुनिया में शांति स्थापित करने के उनके प्रयासों के लिए उन्हें कम से कम आठ बार नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने ईरान को यूरोप को तबाह करने से रोकने और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का भी दावा किया।

इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर लगाए प्रतिबंध

नोबेल समिति के फैसले से खफा ट्रंप प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए। ट्रंप प्रशासन ने इस अदालत की तीखी आलोचना करते हुए इसे कानून का उल्लंघन करने वाला और स्वतंत्र न होने का आरोप लगाया। अमेरिका ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस अदालत ने अपनी सीमाएं लांघीं, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

मानवाधिकारों के लिए समर्पित रहा है नावी पिल्लै का जीवन

इस वर्ष शांति का नोबेल पुरस्कार पाने वाली नावी पिल्लै का जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका में हुआ था और उनके पूर्वज भारत के तमिलनाडु के रहने वाले थे। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में जज रह चुकी हैं। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में रंगभेद के खिलाफ वकालत की और नेल्सन मंडेला सहित कई राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। महात्मा गांधी के विचारों से गहरी प्रेरणा लेने वाली नावी पिल्लै को यह सम्मान मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है।

Leave a Reply