छत्तीसगढ़: साय कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले, आदिम जाति विभाग के नाम में बदलाव से लेकर भर्ती तक चर्चा

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मंत्रालय (महानदी भवन) में साय कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक के समापन के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संयुक्त रूप से मीडिया को कैबिनेट में लिए गए प्रमुख निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी।
अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर होगी भर्ती
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि मंत्रिपरिषद की इस बैठक में देश की सेवा कर चुके पूर्व अग्निवीरों के हित में एक बड़ा निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ के गृह विभाग में पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक (कांस्टेबल) के 36 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती करने का विधिवत निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, प्रशासनिक सुधार के तहत 'आदिम जाति विभाग' का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'जनजाति कार्य विभाग' करने का महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि आज छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष (मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक) सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर एक गौरवशाली अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए केवल एक उपलब्धि का अवसर भर नहीं है, बल्कि 'राष्ट्र प्रथम', जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के मूल सिद्धांतों पर आधारित एक असाधारण कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है। छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और पूरी मंत्रिपरिषद की ओर से उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दूरदर्शी नेतृत्व, जनसेवा और राष्ट्र समर्पण का हृदय से अभिनंदन किया तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ जीवन की कामना की।
मंत्रिपरिषद ने जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और नक्सलवाद से निर्णायक मुक्ति जैसे राष्ट्रहित के ऐतिहासिक कदमों की भी सराहना की।
गुजरात मॉडल और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने गुजरात के कार्यकाल के दौरान शासन में टेक्नोलॉजी, जनसंवाद और परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली के जो अनूठे प्रयोग किए थे, उन्हें बाद में पूरे देश में अपनाया गया। वर्ष 2000 में नव-गठित राज्य छत्तीसगढ़ ने अपनी विकास यात्रा के शुरुआती दौर में गुजरात मॉडल के सफल अनुभवों से प्रेरणा लेकर तेजी से प्रगति की।
राज्य में निवेश और टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम' के तहत औद्योगिक अनुमतियों को बेहद सरल बनाया गया है। वन-क्लिन सिंगल विंडो सिस्टम और दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से गैर-जरूरी प्रावधानों को समाप्त किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य को कुल 8.50 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 1.60 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
गरीब कल्याण, कृषि और किसान सशक्तिकरण
आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में ही 11.78 लाख आवासों का निर्माण हुआ है, जिससे निर्माण की गति में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर है।
स्वास्थ्य सुविधाएं: आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 2.49 करोड़ (करीब 92 प्रतिशत) पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनाए जा चुके हैं, और 51.17 लाख से अधिक लोगों को निःशुल्क उपचार का लाभ मिला है।
कृषि एवं धान उपार्जन: राज्य में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख हो गई है। धान उपार्जन का आंकड़ा भी बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जिसके तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बोनस का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।
महिला, युवा और जनजातीय विकास के विशेष कार्य
महतारी वंदन योजना: राज्य की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रति माह 1,000 रुपये की सीधी वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, और 14 लाख से अधिक महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं।
जनजातीय कल्याण: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 6,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे का तीव्र विकास किया जा रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भी स्थापित किया गया है।
नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार और बस्तर में शांति
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के बल पर 31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी भीषण नक्सल समस्या से पूरी तरह और निर्णायक मुक्ति मिल चुकी है। प्रधानमंत्री के विजन—"कंधे पर गन नहीं, कंधे पर हल ही सभी समस्याओं का हल है"—ने बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास के नए रास्ते खोल दिए हैं। हिंसा के कारण बरसों से बंद पड़े 421 स्कूलों को फिर से खोला गया है तथा 'नियद नेल्ला नार योजना' के माध्यम से दूरदराज के अंचलों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं सफलतापूर्वक पहुंचाई जा रही हैं।
विकसित छत्तीसगढ़ से विकसित भारत 2047 का संकल्प
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि देश को 2047 तक 'विकसित राष्ट्र' बनाने के प्रधानमंत्री के महासंकल्प में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने 'छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047' का रोडमैप तैयार कर लिया है। "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" की भावना के साथ मंत्रिपरिषद ने विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में अपना पूर्ण योगदान देने का दृढ़ संकल्प दोहराया है।
