हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकता है अमेरिका

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। रियाद के मुख्य हवाई अड्डे पर हुए जानलेवा हमले के बाद ट्रंप का यह कदम अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे युद्ध के एक और मोर्चे पर खींच सकता है। 

रविवार को इस बारे में व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इस बढ़ते संघर्ष का असर दुनिया भर में तेल की आपूर्ति और कीमतों के साथ-साथ समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो हूती विद्रोही यमन के पास लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रोक सकते हैं। इससे फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति भी और प्रभावित हो सकती है। 

हूती विद्रोहियों ने पिछले महीने इस जलडमरूमध्य के पास के अहम इलाकों पर कब्जा कर लिया था। सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन इन इलाकों को वापस लेने की कोशिश कर रहा है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब के पास मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली रक्षा प्रणालियों के इंटरसेप्टर तेजी से कम हो रहे हैं। सऊदी अरब ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से क्षेत्र में हवाई रक्षा के लिए मदद भेजने का अनुरोध किया है। 

एक अधिकारी ने यह भी बताया कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के अपने मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार भी कम हुआ है। वहीं, ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने संकेत दिया है कि ब्रिटेन सऊदी अरब को और सहायता दे सकता है।

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