सुपोषण को सशक्त बना रहीं जमावाड़ा ग्राम की महिलाएं

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में कुपोषण दूर करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का अभियान चलाया जा रहा है। 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, और धात्री माताओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराकर कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करना।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस मिशन के माध्यम से महिलाएं पारंपरिक घरेलू कार्यों और खेती-किसानी के साथ विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं। ईंट निर्माण, रेडी-टू-ईट पोषण आहार, पशु आहार एवं मसाला निर्माण से लेकर परिवहन और राजमिस्त्री जैसे कार्यों में भी महिलाएं अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। बस्तर जिले के जमावाड़ा ग्राम की प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इसी बदलाव का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं।
बिहान मिशन से मिली नई पहचान, पोषण आहार निर्माण बना आजीविका का माध्यम
बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम तूरेनार में प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण एवं पैकेजिंग कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों तक पौष्टिक आहार पहुंचाकर कुपोषण मुक्ति अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
समूह की सचिव श्रीमती मायावती बघेल ने बताया कि वर्ष 2025 से उनका समूह रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य कर रहा है। समूह में कुल 12 महिलाएं सदस्य हैं, जो पूरी सावधानी, स्वच्छता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पोषण आहार तैयार करती हैं। इस कार्य से महिलाओं को नियमित रोजगार मिलने के साथ ही आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर भी प्राप्त हुआ है।
पौष्टिक सामग्रियों से तैयार हो रहा मीठा शक्ति आहार और नमकीन दलिया
श्रीमती बघेल ने बताया कि पोषण आहार तैयार करने के लिए गेहूं, रागी, सोयाबीन, मूंग दाल, मूंगफली, तेल और गुड़ जैसी पौष्टिक सामग्रियों का निर्धारित अनुपात में मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण से बच्चों के लिए ‘मीठा शक्ति आहार’ तथा महिलाओं एवं किशोरियों के लिए ‘नमकीन दलिया’ जैसे पोषण उत्पाद तैयार कर उनकी पैकेजिंग की जाती है। निर्माण कार्य के दौरान स्वच्छता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
15 समूहों के माध्यम से 409 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रहा पोषण आहार
श्रीमती बघेल ने बताया कि समूह द्वारा तैयार पोषण आहार जिले के 15 समूहों को वितरित किया जाता है, जिनके माध्यम से यह सामग्री कुल 409 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रही है। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित पोषण गतिविधियों को सहयोग मिल रहा है। समूह की महिलाओं को इस बात की विशेष खुशी है कि उनके परिश्रम से तैयार पोषण आहार बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के बेहतर पोषण में उपयोगी साबित हो रहा है।
हर महीने 6 से 7 हजार रुपए की आमदनी से मजबूत हो रही आर्थिक स्थिति
समूह की आर्थिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए श्रीमती मायावती बघेल ने बताया कि रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण कार्य से प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपए की आमदनी हो रही है। इस आय से महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं। नियमित आय ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है और परिवार में आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।
आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभा रहीं महिलाएं
प्रगति महिला स्व-सहायता समूह की यह पहल महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकार का प्रेरक उदाहरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर जमावाड़ा ग्राम की महिलाएं यह साबित कर रही हैं कि सामूहिक प्रयास, मेहनत और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग कर ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और सुपोषण जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों की प्राप्ति में भी सक्रिय भागीदार बन सकती हैं।
