इंदौर के अन्नपूर्णा मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है, संगमरमर की खूबसूरती और हाथियों वाला गेट है खास

इंदौर। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के देवी मंदिरों में भारी रौनक देखने को मिल रही है और प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। शहर का प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर यहां की धार्मिक आस्था के साथ-साथ एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी विशेष पहचान रखता है। संगमरमर से निर्मित इस भव्य मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण भारतीय वास्तुकला और स्थापत्य शैली में गढ़ा गया है, जिसके चलते इंदौर आने वाले पर्यटकों की सूची में यह मंदिर हमेशा शामिल रहता है।
लगभग 67 साल पुराना है इतिहास और विकास का सफर
आज से करीब 67 साल पहले जब इस मंदिर की स्थापना की गई थी, तब इस पूरे इलाके में केवल खेती हुआ करती थी और चारों तरफ सघन जंगल हुआ करते थे। उस दौर में यहां गिने-चुने मकान ही हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ इस पूरे क्षेत्र की पहचान और विकास इसी अन्नपूर्णा मंदिर के नाम से जुड़ गया। मंदिर के संस्थापक प्रभानंद गिरी महाराज ने यहां एक छोटी सी कुटिया बनाकर निवास किया था और एक विशाल पेड़ के नीचे बैठकर पूजा-अर्चना करते थे।
संकल्प से लेकर भव्य निर्माण तक की दास्तान
संत प्रभानंद गिरी महाराज ने ही यहां मां अन्नपूर्णा के भव्य मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया था, जिसके बाद धीरे-धीरे उन्हें जनसहयोग भी मिलने लगा। इसके बाद लगभग दो एकड़ भूमि पर इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। आखिरकार 21 फरवरी 1959 का वह ऐतिहासिक दिन आया, जब मंदिर में मां अन्नपूर्णा समेत तीन प्रमुख देवियों की मूर्तियों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद, वर्ष 1975 में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर के भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया गया। वक्त के साथ इस पावन धाम की ख्याति दूर-दूर तक फैलती गई और मंदिर के आसपास भारी बसाहट व शहरीकरण होता चला गया। इंदौर के इस धार्मिक और ऐतिहासिक केंद्र की तर्ज पर नासिक में भी एक मंदिर ट्रस्ट का निर्माण किया जा चुका है।
