दिवाली पर क्यों खरीदी जाती है हाथी, घोड़े और कलश के आकार वाली मिठाइयां? जानें इसके पीछे की असली कहानी

दिवाली का त्योहार आते ही बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ जाती है. लेकिन जालौर में दिवाली की मिठास का एक पारंपरिक अंदाज ऐसा भी है, जो अपनी अलग-अलग आकृतियों के कारण लोगों का ध्यान खींचता है. यहां चीनी से तैयार होने वाले बताशे सिर्फ गोल आकार में ही नहीं, बल्कि कई तरह की आकृतियों में बनाए जाते हैं. इन्हीं में सबसे खास पहचान महल मालिया की है.
महल मालिया नाम से ही इसकी खासियत का अंदाजा लगाया जा सकता है. ये बताशे महल जैसी आकृति में तैयार किए जाते हैं और दिवाली के दौरान लक्ष्मी-गणेश पूजन में इनका इस्तेमाल किया जाता है. पूजा के लिए बाजार में आने वाले इन बताशों को देखकर बच्चों से लेकर बड़े तक आकर्षित होते हैं.
हाथी, बतख, कलश और दीपक के आकार में भी बनते हैं बताशे
जालौर में बताशों की खासियत सिर्फ महल मालिया तक सीमित नहीं है. यहां अलग-अलग जरूरत और परंपरा के अनुसार कई तरह की आकृतियां तैयार की जाती हैं. इनमें महल के साथ हाथी, बतख, कलश और दीपक जैसी आकृतियों वाले बताशे भी देखने को मिलते हैं. इनकी बनावट इन्हें पारंपरिक गोल बताशों से अलग बनाती है.
दिवाली पर महल मालिया की रहती है खास मांग
किराणा व्यापारी अर्जुन माली ने लोकल 18 को जानकारी दी कि दिवाली के समय अलग-अलग तरह के बताशे आते हैं. महल मालिया की खास मांग रहती है. इसके अलावा हाथी, कलश और दूसरी आकृतियों वाले बताशे भी लोग पूजा के लिए लेते हैं. जालौर में इनकी परंपरा काफी पुरानी है और दिवाली पर लोग इन्हें खास तौर पर खरीदते हैं.
लक्ष्मी पूजा में बताशों का खास महत्व
दिवाली की लक्ष्मी पूजा में बताशों को शुभता और मिठास से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि मिठास से भरे इन प्रसाद के जरिए घर में सुख-शांति और खुशहाली की कामना की जाती है. यही वजह है कि पूजा की सामग्री में बताशे आज भी अपनी जगह बनाए हुए हैं.
परंपरा से जुड़ी है बताशों की खरीदारी
जालौर के बाजारों में दिवाली से पहले इन पारंपरिक बताशों की मांग बढ़ जाती है. लोग अपनी पूजा की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग आकृतियां खरीदते हैं. कई परिवारों के लिए ये बताशे केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि दिवाली की पुरानी परंपरा का हिस्सा हैं. आज बाजार में आधुनिक मिठाइयों और तरह-तरह की सजावटी चीजों की भरमार है. इसके बावजूद जालौर के पारंपरिक बताशे अपनी पहचान बनाए हुए हैं.
