गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में मौसम की मार, तेज हवाओं से धान की फसल को भारी नुकसान

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के प्रकोप के चलते छत्तीसगढ़ के कई अंचलों में भारी तबाही देखने को मिल रही है, जिससे विशेष रूप से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बीती रात से लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा और तीव्र गति से चल रही हवाओं के कारण खेतों में लहलहाती धान की फसल को भारी क्षति पहुँची है। इस प्राकृतिक आपदा और गंभीर मौसम की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में 'रेड अलर्ट' घोषित कर दिया है, तथा सुरक्षा के एहतियाती कदम उठाते हुए तमाम शासकीय व अशासकीय विद्यालयों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों में एक दिन के अवकाश का ऐलान किया गया है।

चक्रवात के कहर से धान की पकी फसल हुई तबाह

क्षेत्र के किसानों के लिए यह चक्रवात भारी विपत्ति बनकर आया है, जिससे उनकी महीनों की मेहनत पलभर में नष्ट हो गई है। प्रभावित किसानों का कहना है कि पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने उनके खेतों में खड़ी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है। धान की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए बिल्कुल तैयार खड़ी थी, परंतु अचानक आए इस बेमौसम चक्रवाती संकट ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। अन्नदाताओं के अनुसार इस आपदा के कारण उन्हें भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका पूरा सालभर का बजट और जीवनयापन संकट में पड़ गया है।

किसानों की कर्ज के बोझ की चिंता और शासन से मुआवजे की गुहार

फसलों के इस भारी नुकसान से हताश और परेशान किसानों ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए जल्द से जल्द मुआवजे की मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने खेती-किसानी और फसल उगाने के लिए बैंकों तथा अन्य माध्यमों से भारी कर्ज ले रखा था, जो अब फसल नष्ट हो जाने के बाद चुकाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। पीड़ित किसानों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि उनके खेतों का त्वरित सर्वे कराया जाए और हुए नुकसान की भरपाई के लिए उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि वे इस गहरी आर्थिक संकट से उबर सकें।

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