पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची पर फिर विवाद, भाजपा ने कहा- SIR का काम अधूरा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की समाप्ति के उपरांत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद समिक भट्टाचार्य ने शनिवार को बंगाल में नए सिरे से एसआईआर प्रक्रिया को पुनः संचालित करने की पुरजोर मांग उठाई है। उनका तर्क है कि चुनाव के पूर्व संपन्न कराई गई यह प्रक्रिया अपूर्ण थी, इसलिए इसकी सत्यता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे दोबारा कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
हवाई अड्डे पर बैठक और अधिकारियों पर दबाव का आरोप
कोलकाता स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संविदा कर्मचारियों की ट्रेड यूनियन की प्रारंभिक बैठक को संबोधित करते हुए समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से वे राज्य में नए सिरे से एसआईआर कराए जाने की मांग कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली प्रक्रिया के दौरान ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) से लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक को प्रशासनिक स्तर पर डराया-धमकाया गया था। इसके साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि यदि इस प्रकार का प्रशासनिक दबाव न होता, तो मतदाता सूची से और भी अधिक संख्या में फर्जी नामों को हटाया जा सकता था। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान पहले ही लगभग इक्यानवे लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, और इसके अतिरिक्त बीस लाख से अधिक फर्जी स्वास्थ्य साथी कार्ड मिलने का दावा भी इस पूरी प्रक्रिया की आवश्यकता को प्रमाणित करता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्य की सराहना और विपक्ष पर निशाना
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की विपक्ष द्वारा उठाई जा रही मांगों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि वर्तमान में पश्चिम बंगाल की जनता ज्ञानेश कुमार के कार्यों से संतुष्ट है और राज्य में पिछले सत्तर वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर है जब चुनाव इतने शांतिपूर्ण माहौल और पूर्णतः हिंसा-मुक्त तरीके से संपन्न हुए हैं। चुनाव आयुक्त के निष्पक्ष और सराहनीय कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' सम्मान से अलंकृत करने की मांग भी कर डाली।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी नेतृत्व पर तीखे हमले
समिक भट्टाचार्य ने कांग्रेस और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर भी जमकर राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को 'परजीवी राजनीतिक दल' की संज्ञा देते हुए कहा कि जिस पार्टी से कभी महात्मा गांधी, सरदार पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी महान विभूतियां जुड़ी थीं, उसे आज अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए अन्य क्षेत्रीय दलों के बैसाखी का सहारा लेना पड़ रहा है। तृणमूल कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने दावा किया कि अब यह पार्टी एक राजनीतिक ताकत के रूप में सिमट चुकी है और आंतरिक कलह के कारण तीन अलग-अलग गुटों—ममता तृणमूल कांग्रेस, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस और एनसीपीआई—में विभाजित हो चुकी है। इसके अलावा, बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बिहार में मछुआरों के साथ मछली पकड़ने की गतिविधि में भाग लेने की घटना पर भी उन्होंने तंज कसा और कहा कि आम जनता ने ऐसे राजनीतिक तौर-तरीकों को पूरी तरह से नकार दिया है।
