धनतेरस पर ज्वेलरी दुकानों में उमड़ी भीड़, कारोबार में 12% की वृद्धि

नई दिल्ली। देश भर में पावन पर्व धनतेरस के अवसर पर सोने और चांदी की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव व नरमी का सीधा लाभ ग्राहकों के साथ-साथ सर्राफा बाजार को भी मिला। इस विशेष अवसर पर बाजारों में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने बढ़-चढ़कर खरीदारी की, जिसमें विशेष रूप से सोने के सिक्कों और हल्के आभूषणों की मांग सबसे आगे रही। आभूषण कारोबारियों के अनुसार, गत वर्ष की तुलना में इस बार त्योहारी बिक्री में 20 से 25 प्रतिशत तक का शानदार उछाल दर्ज किया गया है। अकेले मुंबई महानगर में धनतेरस के दिन लगभग 50 टन सोने की बिक्री होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बुलियन बाजारों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल व्यापार दर्ज किया गया है।

आईबीजेए के आंकड़े और बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी

इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार धनतेरस के मौके पर कुल कारोबार में 12 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। पिछले साल जहां लगभग 46 टन सोने की कुल खपत हुई थी, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 52 टन तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि कीमती धातुओं की दरों में आई आंशिक गिरावट के कारण ग्राहकों में खरीदारी को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। आईबीजेए के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि मुंबई में रात नौ बजे तक 50 टन से अधिक सोना बिक चुका था। इस बार बाजार में मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के ग्राहक नजर आए, जिनमें पिछले साल के वे निवेशक शामिल हैं जिन्होंने पुराना सोना बदलकर नई ज्वैलरी खरीदी, दूसरे आगामी विवाह सीजन के लिए अग्रिम बुकिंग कराने वाले लोग, तथा तीसरे वर्ग में वे खरीदार रहे जिन्होंने दीपावली व धनतेरस के शगुन के तौर पर कम वजन के सिक्के और आभूषण खरीदे। हालांकि, चांदी की कीमतों में अचानक आए उतार-चढ़ाव के कारण इस बार चांदी के प्रति निवेशकों का रुझान कुछ सीमित जरूर रहा।

देशभर में रिकॉर्ड कारोबार और ग्राहकों का उत्साह

कैट के ज्वैलरी चैप्टर ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने बताया कि पिछले कई दिनों से देश के तमाम आभूषण बाजारों में ग्राहकों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ रही थी। उन्होंने आकलन जताया कि इस त्योहारी सीजन में देशभर के भीतर सोने और चांदी का कुल कारोबार 66,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि अकेले दिल्ली के बुलियन बाजारों ने 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार समेटा है। धातुओं के ऊंचे मूल्य स्तर के बावजूद ग्राहकों की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। लोगों ने मुख्य रूप से हल्के वजन के पारंपरिक गहनों, चांदी के सिक्कों और भविष्य के सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने-चांदी की लिवाली को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इस दौरान बाजार में 18 कैरेट सोने की बिक्री का हिस्सा सर्वाधिक रहा, जबकि ग्राहकों की क्रय शक्ति के अनुरूप 14 कैरेट और 9 कैरेट सोने के आभूषणों तथा 1 से 5 ग्राम तक के हल्के सोने के सिक्कों में भी लोगों ने गहरी रुचि दिखाई।

कमोडिटी विशेषज्ञों की राय और बाजार का भविष्य

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में समय-समय पर आने वाली गिरावट ही इस त्योहारी बूम का मुख्य उत्प्रेरक साबित हुई है, क्योंकि निवेशक और आम ग्राहक लंबे समय से सही अवसर की तलाश में थे। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए अभी भी जिंस बाजारों में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है और निकट भविष्य में कीमतों में स्थिरता आने की संभावना काफी कम है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के घटनाक्रम और पश्चिमी एशियाई देशों के भू-राजनीतिक हालात ऐसे प्रमुख कारक हैं जिन पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है, और आने वाले दिनों में बाजार में इसी प्रकार के मिले-जुले रुझान देखने को मिलते रहेंगे।

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