लिपस्टिक इंडेक्स भी कर रहे आर्थिक सुस्ती का इशारा

मुंबई ।  लिपस्टिक इंडेक्स भी भारत में आर्थिक सुस्ती की ओर इशारा कर रहे हैं। ऑटो सेक्टर में बिक्री तेजी से घटने के अलावा कई संकेतक अर्थव्यवस्था की चाल मंद पड़ने की बात कह रहे हैं। लकमे और लॉरिआल जैसे ब्रांड के लिपस्टिक की बिक्री बढ़ गई है। कलर कॉस्मेटिक कैटिगरी सुस्ती की गवाही दे रही है। यह स्पष्ट संकेतक है कि भारत में 'लिपस्टिक इंडेक्स' मौजूद है। लिपस्टिक इंडेक्स का प्रयोग सबसे पहले एस्टी लॉडर के पूर्व चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने वर्ष 2000 की आर्थिक मंदी के दौरान कंपनी की कॉस्मेटिक बिक्री में हुई वृद्धि को समझाने के लिए किया था। भारत में उपभोक्ता इस समय गाड़ी या टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद को टाल रहे हैं, लेकिन लिपस्टिक जैसी छोटी विलासिता के सामान खरीद रहे हैं।
कलर कॉस्मेटिक सुस्ती से अछूत है, इसके पीछे एक कारण यह भी है कि  कंज्यूमर यूसेज अभी भी कम है। जैसे-जैसे महिलाएं ब्रांड्स के प्रति जागरूक हो रही हैं, वे अपग्रेड होना चाहती हैं। कई ब्रैंड्स कुछ अधिक कीमत पर प्रीमियम प्रॉडक्ट्स उपलब्ध करा रहे हैं। कॉस्मेटिक्स की मांग बढ़ने की वजह से ब्राड्स हर लॉन्च में 15-25 शेड्स उतार रहे हैं। ब्यूटी रिटेलर नयका के मुताबिक ग्राहकमेकअप पर लगातार खर्च कर रहे हैं। नयका के चीफ बिजनस ऑफिसर निहिर पारिख ने कहा ‎कि हमारे लिए कारोबार पहले की तरह चल रहा है।

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