जिसने की इंसान की रचना उसी भगवान को कलाकार दे रहा स्वरूप

बिलासपुर । 2 सितंबर दिन सोमवार से 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में नगर के चौक चौराहों तथा गली मोहल्ले वह घरों में सभी जगह गणेश चतुर्थी की धूम पूरे दस दिन रहेगी। इस आयोजन की तैयारी के लिए कई दिनों पहले से ही गणेश प्रतिमा का निर्माण शुरू हो जाता है वही चौक चौराहे की समितियों द्वारा गणेश स्थापना की तैयारियों के लिए बहुत पहले से ही चंदे के रूप में धन एकत्रित कर गणेश प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रयास शुरू हो जाते हैं। नगर में भी इन दिनों कई जगहों पर गणेश प्रतिमा का निर्माण जोरों शोरों पर चल रहा है वही इन प्रतिमाओं को कलाकार अपनी कला से अंतिम रूप देने दिन- रात कड़ी मेहनत कर प्रतिमा को साकार करने के लिए जी जान से जुटे हैं। इसी कड़ी में नगर के श्रीकांत वर्मा मार्ग साईं मंदिर रोड पर राजस्थान से आये मूर्तिकार कैलाश ने कुछ इस कदर प्रतिमाओं को रूप दिया कि एक बार देखने पर यह महसूस होता है मानो अब बोल पड़ेगी मूर्ति इस कलाकार की कला की जहाँ एक और मुक्त कंठ से तारीफ की जा रही है वही समितियों से लेकर घरों में मूर्ति स्थापित करने बस इसी कलाकार से मूर्ति खरीदने की होड़ लग गयी है। छोटे से झोपड़ी नुमा से घर मे निर्मित लोग अपनी पसंद की मूर्ति को चार दिन पहले से ही बुक करा रहे है। इस परिवार की कला को देखकर जहां एक और नगर के लोग हदप्रद है वही उनकी कला को लोग सराह रहे है, हैं इस कलाकार की कला की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। यू तो इस भौतिक युग में प्लास्टिक ऑफ पेरिस की मूर्तियां मशीन द्वारा निर्मित कर काफी सुंदर और सजीव बनाई जाती रही थी लेकिन शासन द्वारा प्लास्टिक ऑफ पेरिस पर रोक लगाने के बाद मिट्टी से बनी मूर्तियों को एक सजग रूप देना अपने आप में एक कठिन कार्य था लेकिन इस कलाकार के हाथों में गजब का जादू है मिट्टी से निर्मित मूर्तियों को इतना सजग रूप देना और इतनी सफाई से उनका सिंगार कर मूर्तियों को जीवंत रूप देना यह बहुत बड़ी कला है इस कलाकार से इसके हुनर के विषय में बात करने पर हमें पता चला कि यह उनका पुश्तैनी कार्य तथा रोजी रोटी का एकमात्र जरिया है कलाकार कैलाश ने बताया कि वह बचपन से ही अपने मां-बाप को मूर्तियां निर्माण करते हुए देखते आ रहा है और अब वही कला उसके हाथों में है सचमुच एक बार अगर सोचा जाए तो इस सृष्टि के रचयिता ने जिसने हमको बनाया और वही इंसान एक दिन अपनी कला से उस भगवान को एक सजग रूप दे कर अदभुत हुनर का परिचय देंगे ये देखकर आश्चर्य भी होता है। कलाकार कैलाश के साथ उसका भाई तथा उसकी पत्नी भी इस कार्य मे पूरी मुस्तेदी से हाथ बटाते है,कई दिन रात की कड़ी मेहनत के बाद ही मूर्ति को सजग रूप दे पाते है पर कलाकार की इस अथक मेहनत के बाद भी ही उनका पूरा परिवार दो जून की रोटी खा पाता है। बहराल मूर्तिकार कैलाश गुजरात से यहाँ सिर्फ गणेश प्रतिमा निर्मित करने हर वर्ष यहाँ अपने पूरे परिवार के साथ करीब दो से तीन माह पहले आ जाते है फिर उसके बाद वापिस अपने घर चले जाते है। विगत एक सप्ताह से लगभग सभी मूर्तियों को अंतिम रूप देने रात में भी परिवार के सभी सदस्य कड़ी मेहनत कर रहे है इस कलाकार की मूर्ति की पूरे नगर में धूम मची है।
