सुन्नी वक्फ़ बोर्ड की SC में दलील – विवादित जगह पर भगवान राम की मूर्तियां चोरी-चुपके से रखी गई थीं

नई दिल्ली: अयोध्या मामले को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में 18वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने बहस शुरू की. मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने हिंदू पक्ष पर बड़ा आरोप लगाया. धवन ने दलील दी कि हिंदुओं ने विवादित जगह पर भगवान राम की मूर्तियां चोरी-चुपके से रखी थीं. राजीव धवन ने कहा कि मस्जिद के भीतर 1949 में मूर्तियों का प्रकट होना कोई दैवीय चमत्कार नहीं बल्कि वह एक 'प्लांड अटैक' था.
धवन ने अपनी बहस को बढ़ाते हुए कहा कि अयोध्या विवाद पर विराम लगना चाहिए. अब राम के नाम पर फिर कोई रथयात्रा नहीं निकलनी चाहिए. उनका इशारा बीजेपी द्वारा 1990 में निकाली गई रथयात्रा की ओर था जिसके बाद बाबरी विध्वंस हुआ था. राजीव धवन ने दलील दी कि विवादित जमीन के ढांचे के मेहराब के अंदर के शिलालेख पर 'अल्लाह' शब्द मिला है. धवन साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि विवादित जगह पर मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद था.
धवन ने यह भी कहा कि मस्जिद का द्वार बंद रहता था और चाबी मुसलमानों के पास रहती थी. शुक्रवार को 2-3 घण्टे के लिए खोला जाता था और साफ साफाई के बाद जुमे की नमाज पढ़ी जाती थी. सभी दस्तावेज और गवाहों ने बयान से साबित है कि मुस्लिम मस्जिद के अंदर के हिस्से में नामज़ पढ़ते थे. धवन ने हिंदू पक्ष की दलील का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास विवादित जमीन के कब्जे के अधिकार नहीं है क्योंकि 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने गलत तरीके से अवैध कब्जा कर लिया था. धवन के मुताबिक, इसके बाद नमाज अता नहीं की गई.
सोमवार को राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा था कि 1934 में हिंदुओ ने बाबरी मस्जिद पर हमला किया, 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में इसे तोड़ दिया और अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए. राजीव धवन के दलील दी कि देश के आजाद होने की तारीख और संविधान की स्थापना के बाद किसी धार्मिक स्थल का परिवर्तन नहीं किया जा सकता. राजीव धवन ने यह भी दलील दी कि महज स्वयंभू होने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अमुक स्थान किसी का है. सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि केस के तथ्यों के आधार पर फैसला दे.
सुनवाई की शुरुआत में मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश राजीव धवन ने उन्हें मिली धमकियों का जिक्र किया. इसपर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व प्रोफेसर षणमुगम को नोटिस जारी किया. प्रोफेसर षणमुगम पर आरोप है कि उन्होंने राजीव धवन को मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश होने के कारण धमकी भरा पत्र लिखा है. अपने को रामभक्त कहने वाले चेन्नई के 88 वर्षीय प्रोफेसर षणमुगम ने राजीव धवन को पत्र लिखकर कहा था कि धवन को मुस्लिम पक्ष के तरफ से पेश नहीं होना चाहिए था. धवन को उनका श्राप लगेगा.
