एसवाईएल को पानी के लिए अभी करना पड़ेगा और इंतजार, हरियाणा की नई सरकारी ही लेगी फैसला

हरियाणा की जीवनरेखा मानी जाने वाली एसवाईएल के पानी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सूखी नहर में पानी अब प्रदेश में बनने वाली अगली सरकार में ही आ पाएगा। चूंकि, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना लिंक नहर के पानी का बंटवारा करने के लिए चार महीने का समय केंद्र सरकार को दिया है। ऐसे में अब वर्तमान भाजपा सरकार में सूखी एसवाईएल के तर होने की उम्मीद न के बराबर रह गई है।
प्रदेश में अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस महीने के दूसरे सप्ताह में चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसलिए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अभी एसवाईएल पर कोई भी अंतिम निर्णय नहीं हो पाएगा। वर्तमान भाजपा सरकार के पांच साल में एसवाईएल नहर का पानी हरियाणा लाने के लिए प्रयास तो बहुत हुए, लेकिन अंतिम नतीजा प्रदेश के हित में पानी को लेकर आना अभी बाकी है। चूंकि, पंजाब सरकार पानी की एक भी बूंद न देने के अपने फैसले पर अडिग है।
यही हरियाणा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसलिए एसवाईएल का निपटारा कराने का जिम्मा प्रदेश सरकार ने केंद्र पर ही छोड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के चार महीने का समय देने के बाद केंद्र सरकार एसवाईएल का निपटारा कैसे कराती है, इस पर सबकी निगाहें लगी रहेंगी। चूंकि, हरियाणा के साथ ही पंजाब भी केंद्र में एसवाईएल के पानी को लेकर जोरदार पैरवी करता आ रहा है। पंजाब का यही सबसे बड़ा तर्क है कि उसके पास अपने लिए ही पर्याप्त पानी नहीं है, वह हरियाणा को कहां से दे। इसमें केंद्र सरकार भी उलझी हुई है।
भाजपा सरकार में ही आया राष्ट्रपति संदर्भ
एसवाईएल के हिस्से का पानी हरियाणा को देने के लिए राष्ट्रपति संदर्भ भाजपा सरकार में ही आया। प्रदेश की मनोहर लाल सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष इस मुद्दे को सत्ता में आने के बाद उठाया था और आग्रह किया था कि एसवाईएल को लेकर राष्ट्रपति अपना संदर्भ जल्दी दें। यह संदर्भ हरियाणा के हक में था।
इसके बाद हरियाणा का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बाद में नितिन गडकरी से भी मिला था। पीएम नरेंद्र मोदी से हालांकि इस मुद्दे पर प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात नहीं हो पाई थी। इस मुद्दे पर हरियाणा विधानसभा के लगभग सभी सत्र में हंगामा भी हुआ और चर्चा भी।
इनेलो छेड़े रही आंदोलन, कांग्रेस ने भी उठाया मुद्दा
बीते पांच साल में इनेलो ने एसवाईएल का मुद्दा हरियाणा में गर्माए रखा। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर बने रहने की पूरी कोशिश की। इनेलो ने तो जल न्याय युद्घ भी शुरू किया और इनेलो के सभी बड़े नेता पंजाब बॉर्डर पर नहर की खुदाई करने तक पहुंच गए। इसके बाद इनेलो ने दिल्ली तक प्रदर्शन किए।
हरियाणा में भी आंदोलन छेड़े रखा। इनेलो नेता अभय चौटाला ने हर सत्र में जोरदार तरीके से एसवाईएल के मुद्दे को उठाया तो कांग्रेस ने भी एसवाईएल का पानी न ला पाने के लिए सरकार को घेरने की कोशिश की। जबकि, सरकार उनके कार्यकाल में मामले में तेजी आने का श्रेय लेती रही।
अपने हक का पानी लेकर रहेंगे : मनोहर लाल
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा के हिस्से का पानी उसे मिलना चाहिए। उनके हक में फैसला आ चुका है। एसवाईएल का पानी मिलने से दक्षिण हरियाणा में भी खुशहाली आएगी। उन्हें सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार पर पूरा विश्वास है कि वे हरियाणा को उसके हिस्से का पानी दिलाकर रहेंगे।
