शिक्षक दिवसः 100 साल पहले शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी है, मुन्नालाल की पांचों पीढ़ियां टीचर

अंग्रेजों के समय में शिक्षा की अलख जगाने का जो सिलसिला मास्टर मुन्नालाल ने 100 साल पहले शुरु किया था, उसे उनकी पीढ़ियां 100 साल बाद भी जारी रखे हुए हैं। मुन्नालाल का परिवार कुरुक्षेत्र ही नहीं, बल्कि हर किसी के लिए अनूठी मिसाल है, क्योंकि एक सदी के अंदर शिक्षण और शिक्षा विभाग में इस परिवार से एक, दो, तीन या 20, नहीं बल्कि 30 लोग टीचिंग के क्षेत्र में काम चुके हैं।
रोचक पहलू ये है कि कुरुक्षेत्र में स्थित ताजमहल के समकालीन ऐतिहासिक इमारत (शेख चेहली मकबरा) वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। उसे भले करीब चार सदी पहले शाहजहां और मुमताज महल के ज्येष्ठ पुत्र दाराशिकोह ने बनवाया था, मगर आजादी से पहले तक इस इमारत की पहचान मास्टर मुन्नालाल के स्कूल के रूप में होती थी और वो आज भी उन बुजुर्गो के जहन में ताजा है, जिन्होंने यहां या तो खुद पढ़ाई की थी या उनके परिवार के सदस्यों ने।

मास्टर मुन्नालाल ने इस स्कूल में करीब 40 साल से ज्यादा समय तक न केवल शिक्षण का कार्य किया था, बल्कि उस दौर में शिक्षा का प्रचार प्रसार किया, जिस दौर में भारत में शिक्षा का स्तर काफी नीचे था। इसी शेख चेहली मकबरे से करीब 200 मीटर की दूरी पर बाजडान गली में रहने वाले स्वर्गीय मास्टर मुन्नालाल आज दुनिया में नहीं हैं, लेकिन कुरुक्षेत्र के जिला शिक्षा अधिकारी उनके पौते अरुण आश्री आज भी उनका नाम रोशन कर रहे हैं।

बता दें कि कुरुक्षेत्र के डीईओ अरुण आश्री की पत्नी शबनम आश्री भी जिला कुरुक्षेत्र के गांव खैरी स्थित राजकीय विद्यालय में बतौर प्रिंसीपल सेवाएं दे रही हैं।

पहली और दूसरी पीढ़ी में चार शिक्षक
मास्टर मुन्नालाल ने करीब 1919 से लेकर 1963 तक शिक्षण के क्षेत्र में कार्य किया। इसके बाद उनकी दूसरी पीढ़ी में पांचों पुत्र सुशील प्रकाश, ओमप्रकाश, जयप्रकाश, किशनलाल और रमेश आश्री और उनकी पुत्री शारदा रानी ने अलग-अलग राजकीय विद्यालयों में पढ़ाते हुए सेवाएं दीं। यहां तक की जयप्रकाश आश्री सेवानिवृत्ति के बाद श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा द्वारा संचालित किए गये स्कूल में भी सेवाएं दे चुके हैं।

मास्टर मुन्नालाल के कुटुंब में ये बने शिक्षक
मास्टर मुन्नालाल की पुत्रवधु बिमला आश्री, पुत्रवधु कुसुम आश्री, पुत्रवधु विजया लक्ष्मी, दामाद सुमेर चंद, अंबाला डीएवी स्कूल की शिक्षिका नातिन सीमा शर्मा, मास्टर मुन्नालाल की बहन नाती राकेश शर्मा और राकेश शर्मा की पत्नी सुदेश शर्मा, बेटी की पुत्रवधु रेणु शर्मा, पौत्रा बृजमोहन शर्मा, पौत्रवधु कुसुम शर्मा, पौत्रवधु कांतारानी, पौत्रा अरुण आश्री(जिला के वर्तमान शिक्षाधिकारी), पौत्री पूनम कौशिक, पौत्री नीरज आश्री, पौत्रवधु अनीता शर्मा, पौत्री सोनिया शर्मा सहित एक अन्य पौत्र वधु बतौर शिक्षक कार्य कर रही हैं।

दादा, माता-पिता, चाचा-ताया, सास, ससुर, पत्नी सब शिक्षक
जिला शिक्षा अधिकारी अरुण आश्री ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि यह उनका सौभाग्य है कि वह ऐसे परिवार के सदस्य हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में या तो सफलतापूर्वक अपनी भूमिका निभा चुके हैं या फिर वर्तमान और भविष्य में भी निभाने को अग्रसर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मौसेरी बहन शशि शर्मा, राजौंद में प्रिंसीपल रह चुके ससुर केदार नाथ शर्मा, नारनौल में जिला शिक्षाधिकारी रह चुकी सास सरला शर्मा, पत्नी की बहन अमिता कौशिक और उनकी बुआ का पौत्रा राहुल शर्मा इस्माईलाबाद में सेवारत हैं।

 

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