अन्नपूर्णा रसोई योजना में निशुल्क खाना बांटने के नाम पर किया जा रहा फर्जीवाड़ा

जालोर: भीनमाल में अन्नपूर्णा रसोई योजना के तहत निशुल्क खाना बांटने के नाम पर घोटाला किया जा रहा है. कम लोगों को खाना खिलाकर आंकड़े में यह संख्या चार गुना ज्यादा बताकर भुगतान उठाया जा रहा है. जी मीडिया ने लगातार दो दिन तक वैन की पड़ताल की तो सामने आया कि दोनों वैन से करीब 10 से 15 लोगों ने ही खाना खाया. इसके बाद गाड़ी ने मोहल्लों में जाकर 20 से 25 लोगों को निशुल्क खाना खिलाया. इतने में ही खाना खत्म हो गया, जबकि पालिका से मिली रिपोर्ट के अनुसार हर रोज वैन से नाश्ता के लिए 150, दोपहर और रात्रि भोजन 100 से 125 लोगों का खिलाना दर्शाकर भुगतान उठाया जा रहा है.
शहर में चलने वाली दो वैन से कंपनी रोजाना 17 हजार रुपए का भुगतान ले रही है, लेकिन कंपनी द्वारा खाना लेकर आते समय भी वैन में इतने लोगों का खाना नहीं होता है. जी मीडिया संवाददाता ने पड़ताल की तो मंगलवार को दिन में केवल 10 के भीतर ही लोगों ने टोकन से खाना खाया. इसके बाद बचा खाना खिलाने के लिए वैन भील बस्ती में पहुंची. वहां भी 20 से 25 लोगों को बांटने के बाद खाना खत्म हो गया. बावजूद इसके हर रोज 100 से 125 लोगों को भोजन खिलाना बताया जा रहा है.
फर्जीवाड़े का गणित
35-40 भोजन की प्लेट का वितरण कर कंपनी के कर्मचारी बता रहे हैं कि 100 से 125 प्लेट भोजन की प्लेट वितरित की गई हैं. शहर में संचालित होने वाली दोनों वैनों पर कंपनी नाश्ते के लिए 150-150, दोपहर के भोजन 100-125, शाम के भोजन 100-125 लोगों के लिए सप्लाई कर भुगतान उठा रही है. राज्य सरकार कंपनी को नाश्ता प्रति प्लेट के 21.70 रुपए एवं दोनों समय के भोजन के 23.70 रुपए प्रति प्लेट के हिसाब से भुगतान करती है. ऐसे में रोजाना नाश्ते के लिए 6 हजार 510 रुपए एवं दोनों के समय के भोजन पर 11 हजार 257 रुपए यानी कुल 17 हजार 767 का भुगतान कंपनी को किया जा रहा है. हकीकत यह है कि मौके पर नाश्ते के लिए करीबन 5 लोग, दोपहर के भोजन में 10 एवं शाम के भी औसतन 8 लोग पहुंचते हैं. जबकि 20 से 25 लोगों को ही निशुल्क भोजन कराया जा रहा है.
निशुल्क खाने में हेर-फेर
योजना के तहत टोकन से वितरण होने वाले खाने की डीटेल पूरी तरह सही होती है. कारण कि लोगों को पैसे देकर टोकन कटवाना पड़ता है लेकिन बचा खाना निशुल्क वितरण करते हैं, इसमें जमकर फर्जीवाड़ा होता है. गरीब मोहल्लों में केवल 20 से 25 लोगों में बांटा जाता है, लेकिन यह 100 से 125 तक बता दी जाती है.
पूर्व की वसुंधरा सरकार ने निर्धन और जरूरतमंद लोगों को 5 रुपए में नाश्ता एवं 8 रुपए में पौष्टिक भोजन देने के उद्देश्य से 15 दिसंबर 2016 को अन्नपूर्णा रसोई वैन योजना शुरू की थी. शहर में भी 2 मई 2018 को इस योजना के तहत दो वैन का संचालन शुरू किया गया था. शुरुआत में तो दोनों वैनों पर बड़ी संख्या में लोग खाने के लिए आते थे, लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या घटकर मात्र 5 से 10 ही रह गई है. वर्तमान में एक वैन रोडवेज बस डिपो तो दूसरी राजकीय अस्पताल के बाहर खड़ी रहती है.
अगस्त में 24 हजार को किया गया वितरण
जानकारी के अनुसार शहर में दोनों वैन पर ठेका कंपनी ने अगस्त में नाश्ता करने वालों की संख्या 9,300 बताई, जबकि लंच 6,950 और शाम का भोजन करने वाले की संख्या 7,750 है. यानी कुल 24 हजार लोगों का भुगतान फर्जीवाड़े से उठाने की तैयारी है. अगस्त माह के दौरान वैन नाश्ते के 2 लाख 1 हजार 810 रुपए और डिनर के लिए 3 लाख 48 हजार 390 रुपए का भुगतान उठाने के लिए बिल दे दिया.
