मुस्लिम पक्षकार के वकील बोले- ‘निर्मोही अखाड़े को राम चबूतरा पर पूजा करने का अधिकार है’

नई दिल्ली: अयोध्या (Ayodhya) मामले में 20वें दिन की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पूरा हुई. गुरुवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Rajiv Dhawan) ने पूरे दिन बहस की. शुक्रवार को अयोध्या (Ayodhya) मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ नहीं बैठेगी. सोमवार और मंगलवार को कोर्ट की छुट्टी है. मतलब अब अयोध्या (Ayodhya) मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी. गुरुवार को राजीव धवन (Rajiv Dhawan)ने कहा कि Possesion (स्वामित्व) शब्द art की एक टर्म है, जबकि belonging (संबद्ध) आर्ट का शब्द नहीं है. जस्टिस बोबडे ने पूछा कि possesion आर्ट की टर्म क्यों हैं? 

इसपर जस्टिस नज़ीर ने कहा कि belonging शब्द उनकी याचिका में है और किसी भी क़ानून में नहीं है, आप इस पर क्यों बहस कर रहे हैं? धवन ने कहा कि क्योंकि ये कहा है कि belonging का मतलब 'कुछ और है' (something else). जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा कि वह शेबेट है और यह उनका अधिकार है. धवन ने कहा कि हमको देखना होगा शेबेट के क्या अधिकार है, शेबेट के अधिकार सीमित हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मूर्ति कहां है, मूर्ति जहां जाती है, शेबेट वहीं रहता है. 
उनका कहना है कि उनका अधिकार छीना जा रहा है. जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ ने कहा कि शेबेट के प्रबंधन और प्रभार को मांग रहे हैं. प्रबंधन और प्रभार देवता के लिए है उनके सभी अधिकार देवता के लिए हैं. धवन ने कहा कि ट्रस्टी और शेबेटशिप में फ़र्क़ होता है. वह एक ट्रस्ट की अवधारणा है, लेकिन वह मालिक नहीं है. धवन ने कहा कि मूर्ति को दूर नहीं ले जाया गया जगह स्थानांतरित कर दी गई, इसलिए वह कहते हैं कि पूजा करना चाहते हैं. मेरा अनुरोध है कि यह याचिका के संदर्भ में देखा जाए.

राजीव धवन (Rajiv Dhawan)ने कहा कि राम चबूतरे पर पूजा और पूजा का अधिकार कभी मना नहीं किया गया, विवाद पूरे जमीन के स्वामित्व को लेकर है. राजीव धवन (Rajiv Dhawan)की दलील पर जस्टिस नज़ीर ने पूछा कि आप तो यह मान रहे हैं कि आप और निर्मोही अखाड़ा उस जगह पर साथ-साथ थे? राजीव धवन (Rajiv Dhawan)ने आज फिर कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि निर्मोही अखाड़े का मालिकाना हक़ था. मालिकाना हक़ हमेशा से सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के पास था और है. धवन ने कहा कि राम चबूतरा पर निर्मोही अखाड़ा पूजा करता रहा है और हम इसे मानते हैं कि उनका उस जगह पर पूजा का अधिकार है. राजीव धवन (Rajiv Dhawan)ने 1880 के एक मुकदमें का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों उपासकों की ओर तरफ से पूजा का अधिकार नहीं मांग रहे हैं. दोनों ही प्रबंधन और प्रभार के अधिकार क्यों मांग रहे हैं?
 

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