सुरत-शब्द-योग से मानव अंतिम सच्चाई को प्राप्त कर सकता है- प्रो सतसंगी

आगरा: दयालबाग और कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय द्वारा 'दयालबाग साइंस ऑफ कॉनशियसनेस' विषय पर संयुक्त रूप से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठि का आयोजन हुआ. इसमें 89 वैज्ञानिकों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए. इसमें सबसे प्रमुख शोध पत्र था राधास्वामी मत के आठवें आचार्य और एमिरट्स चेयर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी का. प्रोफेसर सतसंगी ने अपने अनुभवों पर आधारित शोध पत्र 'संपूर्ण न्यूरो थियोलॉजी एक अंतिम सत्य- चेतना विज्ञान' प्रस्तुत किए.
अपने शोध पत्र के माध्यम से प्रोफेसर सतसंगी ने वैज्ञानिक तरीकों से समझाया कि सुरत-शब्द- योग द्वारा मानव किस प्रकार अंतिम सच्चाई को प्राप्त कर सकता है. इस शोध पत्र को तैयार करने में दयालबाग में समय-समय पर कई प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते रहे हैं. यहां हो रहे शोध पूर्ण रूप से विज्ञान और गणित पर आधारित है.
दुनिया के कई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने लिया हिस्सा
इस संगोष्ठी में वाटरलू विश्व विद्यालय के प्रोफेसर पीटर रो, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न इंडियाना से प्रोफेसर रोशो जेनारो, ओकलोहामा स्टेट यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर सुभाष काक और जर्मनी की एल्ब्रेश यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर अन्ना होरतचेक ने प्लेनरी टॉक में हिस्सा लिया.
435 केंद्रों पर हुआ सीधा प्रसारण
पूरे संगोष्ठी के दौरान दयालबाग और कनाडा के वाटरलू विश्वविद्यालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे. इसका सीधा प्रसारण दयालबाग के देश-विदेश के 435 से अधिक केंद्रों पर हुआ. इससे कुल 1.50 से लेकर 1.70 लाख कर प्रतिभागी संगोष्ठी से जुड़े रहे और इसका लाभ ले सके.
