अवसाद को मिटा सकते हैं  आसानी से : मिश्र      

भोपाल। तनाव और अवसाद धीरे धीरे हमारे समाज में हमारे घरों में और हमारे भीतर बाढ़ के पानी की तरह घुस रहा है, लेकिन इसे रोका जा सकता है और अवसाद को खत्म किया जा सकता है। ये उद्गार जाने माने लेखक और प्रेरक दयाशंकर मिश्र ने प्रकट किए। वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल        (सीआरपीएफ) के बंगरसिया परिसर में 'जीवन संवाद' कार्यक्रम में बोल रहे थे। इसका आयोजन पुलिस बल की इकाई क्षेत्रीय परिवार कल्याण समिति (कावा ) ने किया।  जीवन, अवसाद और डिप्रेशन से जुड़े विषयों पर संवाद कार्यक्रम में चार सौ से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी रही। उदासी, निराशा, अवसाद और आत्महत्या से जुड़े सवालों पर जवाब देते हुए प्रेरक दयाशंकर ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया को कुछ समय के लिए खुद से दूर रखिए। किसी के लाइक्स और कमेंट्स को लेकर बहुत अधिक अधीर मत हो जाइए। उन्होंने कहा कि माता पिता, भाई बहन, बुआ चाचा, मौसी मामा और मित्रों से जीवंत संपर्क रखिए। उनके घर जाइए और उन्हें अपने घर आने को कहिए।  संवाद में सबसे अधिक जटिल, गहरे सवाल अतीत को लेकर सामने आए। श्री मिश्र ने कहा कि अतीत के आंगन में ताला लगाए बिना वर्तमान के द्वार पर सुकूून से बैठना संभव नहीं , इसलिए इसे अधूरा मत छोड़िए ।              सादर प्रकाशनार्थ

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