अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में पंजाब में किसानों का प्रदर्शन, पुलिस ने जिले में ही रोका

पंजाब के विभिन्न किसान यूनियनों ने रविवार को चंडीगढ़ कूच के लिए राज्य स्तरीय रैली बुलाई थी। हालांकि पुलिस ने जिले स्तर पर ही चंडीगढ़ जा रहे किसानों को रोक लिया है। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं बीच सड़क पर ही धरना लगा कर बैठ गईं हैं। सुनाम के गांव महिला चौक के नजदीक भी किसानों का धरना जारी है।
इस दौरान उन्होंने पटियाला मुख्य मार्ग को भी रोक दिया है। बताया जा रहा है कि पंजाब के कई इलाकों में ऐसी ही स्थिति है। पंजाब के बठिंडा में भी किसान धरने पर बैठ गए हैं। वहीं प्रशासन भी चौकन्ना है। बता दें कि अनुच्छेद 370 और 35A के हटाने के विरोध में पंजाब के 15 किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय रैली बुलाई है।
रैली की नहीं मिली मंजूरी
कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के विरोध में पंद्रह सितंबर यानि आज होने वाली रैली को सुरक्षा कारणों के चलते प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी है। यह फैसला जिला मजिस्ट्रेट कम डिप्टी कमिश्नर गिरीश दियालन की तरफ से लिया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि रैली के लिए झंडा सिंह निवासी जेठुके, लखविंदर सिंह व कमलप्रीत पन्नू ने 13 सितंबर को शाम चार बजे ईमेल के माध्यम से अर्जी भेजी थी। रैली 15 सितंबर को सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक दशहरा ग्राउंड से यूटी चंडीगढ़ तक करने की योजना थी। इसमें 7500 पुरुष, 500 औरतों व 100 के करीब बच्चों के शामिल होने की संभावना है।
दियालन ने कहा कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश व पंजाब सरकार की एडवाइजरी के संदर्भ में आई एप्लीकेशन पर विचार किया। उन्होंने कहा कि इन दिशा निर्देशों में स्पष्ट है कि ऐसे समागम की मंजूरी के लिए कम से कम सात दिन पहले आवेदन करना होता है।। लेकिन यह अर्जी लेट प्राप्त हुई है। ऐसे में अलग-अलग विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। समय की कमी के कारण सारे विभागों से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है।
कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के विरोध में थी रैली
यह रैली कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के विरोध में 15 सितंबर को होनी थी। रैली को लेकर चंडीगढ़ के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था। उसने कहा था कि रैली से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। जैसे ही मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। उसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब और चंडीगढ़ दोनों के डीजीपी को सुरक्षा की कमान संभालने के आदेश दिए थे।
साथ ही कहा था कि किसी भी कीमत पर जान माल का नुकसान नहीं होना चाहिए। उसके बाद 12 सितंबर को मोहाली जिला प्रशासन ने पूरे जिले में दस नवंबर तक धारा 144 लागू कर दी थी। इसके तहत धरने, रैलियों, प्रदर्शन, हड़ताल व नारेबाजी आदि पर पाबंदी लगा दी गई थी।
