अपने दादा के कृत्यों के लिए माफी मांगें बिक्रम मजीठिया और हरसिमरत: रंधावा

पंजाब के सहकारिता और जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शनिवार को मांग की कि बिक्रम सिंह मजीठिया और हरसिमरत कौर बादल अपने दादा सुंदर सिंह मजीठिया के पापों के लिए माफी मांगें। जिनकी 13 अप्रैल, 1919 को हुए जलियांवाला बाग नरसंहार और श्री ननकाना साहिब के नरसंहार में सीधी शमूलियत थी।
उन्होंने कहा कि इस साल 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग के खूनी नरसंहार की शताब्दी पूरी हो गई और इस साल नवंबर महीने में श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मनाने जा रहे हैं, इसलिए यही समय है कि दोनों बहन-भाई अपने दादा के किये पापों के बदले माफी मांगें।

रंधावा ने एसजीपीसी से भी अपील की है कि वह हरसिमरत और बिक्रम के धार्मिक समागम में शामिल होने पर तब तक पाबंदी लगा दें, जब तक वह श्री अकाल तख्त साहिब के आगे अपने दादा के जुर्मों की माफी नहीं मांग लेते।
 
चंडीगढ़ में एक प्रेस बयान में रंधावा ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों से साफ है कि सुंदर सिंह मजीठिया इन दोनों घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल थे और उन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों के विरुद्ध अंग्रेजों का साथ दिया।

रंधावा ने कहा कि वीएन दत्ता इतिहासकार के अनुसार, सुंदर सिंह मजीठिया भारत में अंग्रेजों का एक कट्टर समर्थक था और उसने हमेशा क्रांतिकारियों की गतिविधियों का विरोध किया। उसके समर्थन के लिए अंग्रेजों ने उसको ‘सर सरदार बहादुर’ का दर्जा देने के साथ-साथ पैंशन और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में जागीर भी दी।

उन्होंने कहा कि 1920 में सुंदर सिंह मजीठिया को जलियांवाला बाग के खूनी नरसंहार में जनरल डायर का साथ देने के लिए अंग्रेजों की तरफ से विशेष सम्मान दिया गया। इसी तरह ननकाना साहिब नरसंहार में लाहौर डिवीजन के समकालीन कमिश्नर सीएम किंग, जेडबल्यू बौअरी एसपी, महंत देवी दास, बसंत दास, सुन्दर सिंह मजीठिया और अन्य ननकाना साहिब के नरसंहार के लिए जिम्मेदार थे।

रंधावा ने कहा कि बिक्रम और हरसिमरत को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें वैसे माफी मांगनी चाहिए जैसे सिमरनजीत सिंह मान ने अपने दादा अरुण सिंह की शमूलियत के बदले माफी मांगी थी।

 

 

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