एनजीटी के आदेश को हवा में उडाया प्रशासन ने

भोपाल । राजधानी में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को जिला प्रशासन ने हवा में उडा दिया, जबकि एनजीटी की जोनल सेंट्रल बैंच ने साल 2013 में कहा था कि 6 फिट से बड़ी मूर्ति न बनें। तालाबों में किसी भी स्थिति में मूर्तियों का विसर्जन न हो। इन आदेशों का पालन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी), नगर निगम व जिला प्रशासन को कराना था लेकिन इनमें से एक का भी पालन नहीं हुआ और 11 से 21 फिट ऊंचाई वाली मूर्ति बनती रही। तालाबों में विसर्जन भी नहीं रोका गया। जब शुक्रवार खटलापुरा घाट पर नाव पलटने से 11 युवकों की मौत हो गई। तब प्रशासन जागा है। अधिकारी अब कह रहे हैं कि दुर्गा उत्सव के लिए जो मूर्तियां बन चुकी हैं उन्हें छोड़कर आगे से बड़ी मूर्तियां नहीं बनने देंगे। हालांकि तालाबों में विसर्जन को लेकर अभी भी अफसरों को एनजीटी का आदेश याद नहीं आया है। इसके चलते तालाबों में विसर्जन रोकने को लेकर कोई बात नहीं हुई है। सीपीसीबी ने गाइड लाइन जारी की थी कि मूर्ति बड़ी न बने, तालाबों में विसर्जन न हो, फूल-माला पानी में न डाले जैसे कई बातें लिखी थी। जिन बिंदूओं को लेकर याचिका लगाई गई थी उनमें 11 से 21 फिट तक की बड़ी मूर्तियां बनाई जा रही हैं। जिन जल स्त्रोतों से शहर में पीने के लिए पानी की सप्लाई की जाती हैं उन्हें में मूर्तियां विसर्जित की जा रही हैं, इन्हें रोका जाए। मूर्तियों के विसर्जन के लिए घाटों पर कुंड बनाकर विसर्जन कराया जाए।
इस मामले में एनजीटी ने कहा था कि याचिका में सभी बिंदु गंभीर हैं। इनका कड़ाई से पालन किया जाए। कुंड बनाकर विसर्जन की व्यवस्था करें। एनजीटी के आदेश के बाद याचिकाकर्ता के सुझाव पर सभी घाटों पर कुंड बनाए गए हैं। लेकिन मूर्तियों का विसर्जन अभी भी तालाबों में ही किया जा रहा है। इस बारे में एनजीटी भोपाल के अधिवक्ता सचिन के वर्मा का कहना है कि एनजीटी ने 6 फिट से बड़ी मूर्तियां बनाने व तालाबों में विसर्जन पर रोक लगाई थी। यह भी कहा था कि मूर्ति बनाने व विसर्जन को लेकर सीपीसीबी की गाइड लाइन का पालन करें। वहीं भोपाल क्षेत्र के पीसीबी प्रभारी डॉ. संगीता दानी का कहना है कि एनजीटी के आदेश व सीपीसीबी की गाइड लाइन का पालन जिला प्रशासन व निगम को कराना होता है। गणेश उत्सव के पूर्व इसके लिए पत्र लिखे थे। बड़ी मूर्ति व तालाबों में विसर्जन न हो, इसकी कार्रवाई जिला प्रशासन व निगम को ही करनी थी। उधर भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त राजेश राठौर का कहना है कि वैसे तो पीसीबी को कार्रवाई करनी होती है लेकिन समय-समय पर निगम की तरफ से भी कार्रवाई की जाती है। आगे जो निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा।
