अहिल्या माता गौशाला पर बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु 

इन्दौर । केशरबाग रोड़ स्थित प्राचीन अहिल्या माता गौशाला पर आज भी श्राद्ध पक्ष में सैंकड़ों परिजनों ने गौशाला परिसर पहंुचकर अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में तर्पण एवं गौवंश की पूजा-अर्चना की। गौशाला स्थित सप्त गौमाता मंदिर पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने सपरिवार पहुंचकर गायों को गुड़, रोटी, दलिया, हरी एवं सूखी घास सहित उनके प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया।
गौशाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष रवि सेठी, सचिव पुष्पेंद्र धनोतिया एवं संयोजक सी.के. अग्रवाल ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में गौशाला पर 28 सितंबर तक आम नागरिकों के लिए विद्वान पंडितों के निर्देशन में शास्त्रोक्त विधि से प्रतिदिन सुबह 8.30 से 12.30 बजे तक पितरों के तर्पण की निशुल्क व्यवस्था रखी गई है। आज भी लगभग 200 साधकों ने गौशाला पहुंचकर तर्पण अनुष्ठान में भाग लिया। तर्पण की समस्त सामग्री गौशाला पर निशुल्क उपलब्घ है। इसी तरह गौवंश की पूजा के लिए भी सुबह से दोपहर तक अनेक परिवार आए तथा गायों को उनके प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया। गौशाला में निर्मित प्रदेश के एकमात्र सप्त गौमाता मंदिर में गौवंश की परिक्रमा और पूजन का क्रम भी दिनभर चलता रहा। मान्यता है कि गर्भवती महिलाएं इस मंदिर की परिक्रमा करती हैं तो उनकी होने वाली संतान स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट होती है।
उन्होंने बताया कि गौशाला प्रबंधन द्वारा श्राद्ध पक्ष को श्रद्धा पर्व के रूप में मनाने के निर्णय का गौभक्तों ने खुले मन से स्वागत किया है। आज अनेक परिवारों ने स्मृति वन योजना के तहत पौधरोपण भी किया। इस योजना में दिवंगत परिजनों की याद में गौशाला परिसर में पौध रोपण की व्यवस्था की गई है। मात्र 1100 रू. की सहयोग राशि दे कर कोई भी परिजन अपने दिवंगतों की स्मृति में एक पौधा लगा सकेगा, जिसकी देखभाल का जिम्मा गौशाला प्रबंधन उठाएगा। गौशाला पर तर्पण करने वालों के लिए सात्विक भोजन की व्यवस्था भी  पूरे श्राद्ध पक्ष में उपलब्ध रहेगी। इसके लिए एक दिन पूर्व सूचना देना होगी। श्राद्ध पक्ष में ब्राम्हणों के लिए भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गई है। तर्पण के लिए पूजन सामग्री और गौसेवा के लिए हरी एवं सूखी घास, भूसा, गुड़ एवं औषधि युक्त पौष्टिक लडडू, गुड़, गेहूं की मीठी थूली आदि गौशाला पर ही निःशुल्क उपलब्ध रहेंगे।

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