भटके हुए मानव के लिए प्रकाशपुंज है भागवत ग्रंथ 

इन्दौर । कलियुग में सबसे अधिक दुर्लभ सत्संग को माना गया है। भागवत सत्संग का ही स्वरूप है। मीरा और तुलसी को भी सत्संग से ही अपनी मंजिल मिली है। संसार को स्वार्थ का सबसे बड़ा उदगम स्थल कहा गया है। हर क्षेत्र में स्वार्थ और अनीति का बोलबाला चल रहा है। ऐसे दौर में भागवत जैसा दिव्य ग्रंथ भटके हुए मानव के लिए प्रकाशपुंज का काम करता है। वेद और पुराण भी भागवत के ही अंग हैं। संसार के सारे रिश्ते क्षणिक और झूठे होते हैं, लेकिन भागवत के माध्यम से यदि हम एक बार अपने आराध्य से जुड़ जाएं तो वह रिश्ता हमें मोक्ष की मंजिल तक पहुंचा सकता है।
ये प्रेरक विचार हैं सोजत (राजस्थान) के अंतराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत मुमुक्षुराम महाराज के, जो उन्होंने आज छत्रीबाग रामद्वारा पर भक्त मंडल की मेजबानी में श्राद्ध पक्ष के उपलक्ष्य में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किये। इसके पूर्व रामद्वारा से भागवतजी एवं संतश्री की शोभायात्रा ढोल ढमाकों सहित निकाली गई जो हनुमान मंदिर होते हुए पुनः रामद्वारा पहंुची। सैकड़ों भक्तों ने शोभायात्रा की अगवानी की। भजन एवं गरबा मंडलियां, ढोल ढमाके एवं कलशधारी महिलाओं सहित यात्रा का मार्ग में अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। भजनों की मनोहारी धुनों पर नाचते गाते हुए श्रद्वालुओं का काफिला जहां-जहां से निकला, समूचा मार्ग भागवत मय बनता गया। रामद्वारा परिसर में आयोजन समिति की ओर से देवेंद्र मुछाल, गिरधर नीमा, रामनिवास मोढ, रामसहाय विजयवर्गीय, लक्ष्मीकुमार मुछाल एवं सुरेश काकाणी ने व्यासपीठ का पूजन किया। न्यासी रामसहाय विजयवर्गीय ने बताया कि रामद्वारा पर भागवत कथा 22 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से सांय 5 बजे तक होगी।  
स्वामी मुमुक्षुराम ने भागवत की महिमा बताते हुए कहा कि भागवत का सच्चे मन से श्रवण करने वाले भक्त स्वयं परम भागवत अर्थात भगवान के परम भक्त हो जाते हैं। भागवत भक्ति और ज्ञान के किनारों वाली गंगा है। यह जीवमात्र के कल्याण और उद्धार का सबसे सरल मार्ग है। यह केवल कथा नहीं, ज्ञान का ऐसा सरोवर है जिसमें प्रेम, स्नेह, करूणा, भक्ति और ज्ञान जैसे अनेक रत्न भरे पड़े हैं। जरूरत है तो इस सरोवर में डूबकर इन रत्नों से अपने जीवन को सदगुणों से अलंकृत करने की। कलियुग में सत्संग का एक अंश भी निष्ठा के साथ आत्मसात कर लें तो मनुष्य का जीवन अवगुणों से मुक्त हो जाएगा। भागवत भटकते हुए मानव को मोक्ष की राह पर ले जाना वाला प्रकाश स्तंभ है।

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