RBI ने दूर किया PMC बैंक के ग्राहकों का कन्‍फ्यूजन, कैश लिमिट पर कही ये बात

भारतीय रिजर्व बैंक ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक से कैश निकालने की सीमा बढ़ाने पर स्पष्टीकरण जारी किया है. आरबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि 10 हजार रुपये निकालने की सीमा वाला फैसला अंतिम नहीं है.
    6 महीने के लिए PMC बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैंPMC बैंक पर आरबीआई को गुमराह करने का है आरोप

कई तरह की पाबंदियां झेल रहे पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के ग्राहकों को आरबीआई से झटका लगा है. दरअसल, आरबीआई ने पीएमसी बैंक से कैश निकालने की सीमा बढ़ाने पर स्पष्टीकरण जारी किया है. आरबीआई ने कहा कि 10 हजार रुपये निकालने की सीमा वाला फैसला अंतिम नहीं है. इसका मतलब यह हुआ कि बैंक के ग्राहकों को किसी भी तरह की सहूलियत नहीं मिली है. बैंक के ग्राहकों के लिए अब भी कैश निकालने की लिमिट सिर्फ 1000 रुपये है.

क्‍या कहा आरबीआई ने?

आरबीआई के मुताबिक कैश लिमिट बढ़ाए जाने की खबर भ्रामक है.सेंट्रल बैंक ने कहा कि यह अंतिम फैसला नहीं है. अभी हम इसको लेकर रिव्‍यू कर रहे हैं. बता दें कि बीते मंगलवार से आरबीआई ने अगले 6 महीने तक के लिए पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी थीं. आरबीआई ने यह कार्रवाई बैंकिग रेलुगेशन एक्ट, 1949 के सेक्‍शन 35ए के तहत की है.

क्‍यों हुआ कन्‍फ्यूजन ?

दरअसल, मीडिया में यह खबर चल रही थी कि आरबीआई ने पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक से हर दिन कैश निकालने की लिमिट बढ़ाई है जबकि ऐसा नहीं है. आरबीआई ने गुरुवार के प्रेस रिलीज में कहा था कि जमाकर्ताओं को उनके बचत/चालू या किसी अन्य जमा खाते में रखी कुल शेष राशि में से पहले निकाले गए 1,000 रुपये सहित 10,000 रुपये तक की राशि निकालने की अनुमति दी गई है.
हालांकि, बढ़ी हुई राशि की निकासी तभी हो सकेगी जब खाताधारक की बैंक में कोई कर्ज देनदारी नहीं हो और किसी तीसरे पक्ष को दिये गये कर्ज में जमानतदार के तौर पर उसकी कोई देनदारी नहीं हो. केंद्रीय बैंक के मुताबिक कोई भी बैंक का खाताधारक बैंक से एक ही बार में या फिर छह माह की अवधि के दौरान 10,000 रुपये तक निकाल सकता है.

क्‍या है बैंक पर कार्रवाई की वजह?

दरअसल,  पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर आरोप है कि उसने नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए के बारे में आरबीआई को गुमराह किया है. हालांकि इस गलती को बैंक के निलंबित एमडी थॉमस ने भी स्वीकार किया है. उन्‍होंने न्‍यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान कहा कि एचडीआईएल के खाते में एनपीए को कम कर दिखाने की वजह से यह समस्या खड़ी हुई है.

हालांकि, थॉमस ने यह नहीं बताया कि एचडीआईएल पर बैंक का कितना कर्ज बकाया है.उन्होंने कहा कि यह कर्ज पूरी तरह सुरक्षित या गारंटी वाला है. बता दें कि एचडीआईएल  नकदी संकट से जूझ रही है और दिवाला प्रक्रिया में है. पिछले कई साल से कंपनी भुगतान में देरी कर रही है. इसके साथ ही थॉमस ने ग्राहकों के कन्‍फ्यूजन को भी दूर किया है. उन्‍होंने दावा किया है कि बैंक के खातों में ग्राहकों की पाई-पाई सुरक्षित है.

 

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