कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ जैसलमेर का जाबांज राजेन्द्र, कल होगी अंत्येष्टि

जैसलमेर. पश्चिमी राजस्थान (Western rajasthan) में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा (Indo-Pak International Border) पर बसे जैसलमेर (Jaisalmer) जिले के जाबांज राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh ) जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में शनिवार को आतंकवादियों (Terrorists) से लोहा लेते हुए शहीद (martyr)  हो गए. राजेन्द्र सिंह भारतीय सेना (Indian Army ) की राष्ट्रीय राइफल (RR) में नायक के पद जम्मू-कश्मीर में तैनात थे. शहीद की पार्थिव देह को सोमवार को जैसलमेर लाया जाएगा. वहां उनके पैतृक गांव मोहनगढ़ में पूरे सैन्य सम्मान (Military honor) के साथ अंतिम संस्कार (Funeral) किया जाएगा. राजेन्द्र की शहादत (Martyrdom) की सूचना के बाद शहीद के गांव में सन्नाटा पसर गया. परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम जरुर थीं, लेकिन उन्हें अपने लाडले पर गर्व भी था.

'ऑपरेशन त्रिशक्ति' में शनिवार को हुए शहीद

जम्मू क्षेत्र के रामबन जिले के बटोत में शनिवार को करीब 10 घंटे तक चले 'ऑपरेशन त्रिशक्ति' में सुरक्षा बलों ने 3 आतंकियों मार गिराया था. उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए हैं. इस ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए जैसलमेर का लाडला राजेन्द्र शहीद हो गया.

सोमवार को दोपहर बाद शहीद की पार्थिव देह मोहनगढ़ पहुंचेगी

रविवार को कश्मीर में शहीद मोट्रेल रिमेन सेरोमनी होगी. उसके बाद शहीद की पार्थिव देह को नई दिल्ली लाया जाएगा. वहां सैन्य अधिकारी शहीद को अंतिम सलामी देंगे. उसके बाद सोमवार को विमान सेवा से शहीद की पार्थिव देह को नई दिल्ली से जोधपुर लाया जाएगा. वहां से सड़क मार्ग से दोपहर बाद शहीद की पार्थिव देह मोहनगढ़ पहुंचेगी.

शहीद के पिता भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं

शहीद के पिता सांवल सिंह सत्ता भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं. राजेन्द्र के परिवार में दो छोटे भाई, पत्नी और 2 वर्ष का बेटा है. राजेन्द्र की 3 वर्ष पहले ही शादी हुई थी. राजेन्द्र सिंह के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद से उनकी पत्नी जमना कंवर सदमे में है. ग्रामीणों के अनुसार पिता सांवल सिंह के निधन के बाद राजेन्द्र सिंह ने ही परिवार के भरण पोषण का जिम्मा संभाला था.

एक माह पहले ही घर आकर गए थे

अपने दोनों भाइयों को पैरों पर खड़ा कर उनके विवाह की जिम्मेदारी भी निभाई. राजेन्द्र सिंह करीब एक माह पहले ही घर आकर वापस ड्यूटी पर गए थे.
 

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