आजम खान के किले को बचाने मैदान में उतरीं पत्नी तजीन फातिमा, बीजेपी ने कसा तंज

रामपुर. जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) के लिए अवैध तरीके से जमीन कब्जाने के आरोप में फंसे सपा सांसद आजम खान (Azam Khan) के मजबूत किले को बचाने के लिए समाजवादी पार्टी ने उनकी पत्नी व राज्यसभा सांसद तजीन फातिमा (Tazeen Fatima) को मैदान में उतारा है. आजम खान के लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने से खाली हुई रामपुर (Rampur) शहर की इस सीट पर 21 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने अपने इस मजबूत किले को बचाने की जिम्मेदारी आजम खान (Azam Khan) को सौंपी है. बता दें आजम खान इस सीट से 9 बार विधायक रहे हैं. इतना ही नहीं 1993 के बाद से समाजवादी पार्टी यह सीट कभी नहीं हारी. लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं. 84 से ज्यादा मुकदमों में फंसे आजम खान और उनके परिवार के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का भी विषय बन गई है. जहां एक ओर पार्टी को लगता है कि मुस्लिम बाहुल इस सीट पर आजम के खिलाफ हो रही कार्रवाई से सहानुभूति का लाभ मिलेगा, वहीं वह बीजेपी के साथ-साथ बसपा व कांग्रेस को भी करारा जवाब देने में सफल होगी.
बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ता-केशव
बता दें रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी कई नामों पर विचार कर रही थी. सूत्रों की मानें तो खुद आजम खान किसी हिंदू प्रत्याशी को मैदान में उतारने की हिमायती थे. लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान की पत्नी को टिकट देकर साफ कर दिया कि वे इस गढ़ को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहते. अब आजम खान के कन्धों पर इस सीट की पूरी जिम्मेदारी है. हालांकि, बीजेपी ने आजम की पत्नी को टिकट देने पर समाजवादी पार्टी पर तंज भी कैसा है. डिप्टी सीएएम केशव प्रसाद मौर्या का कहना है कि आजम खान खुद लड़ लें या फिर आजमगढ़ छोड़कर अखिलेश यादव आ जाएं, बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ता. बीजेपी सभी 11 सीटों को जीतने जा रही है.
आजादी के बाद से अब तक मुसलमान नेता ही विधायक बनते रहे हैं
रामपर सीट का इतिहास देखें तो आजादी के बाद से इस सीट का नेतृत्व मुसलमान नेता के ही हाथों रहा है. इसमें सर्वाधिक नौ बार आजम खान ही विधायक बने हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में रामपुर सीट जीतकर वे सांसद बने तो उन्हें विधायकी से इस्तीफा देना पड़ा. जिसकी वजह से इस सीट पर 21 अक्टूबर को मतदान होगा. हालांकि इस सीट पर मुकाबला वैसे तो बीजेपी और सपा के ही बीच है. लेकिन पहली बार उपचुनाव लड़ रही बसपा और कांग्रेस ने भी प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. बीजेपी ने भरत भूषण गुप्ता को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अरशद अली खां गुड्डू और बहुजन समाज पार्टी ने जुबैर मसूद खां को प्रत्याशी घोषित किया है.
