श्री गणेश महा लक्ष्मी पूजन 

श्री गणेश लक्ष्मी प्रभु, ऋद्धि सिद्धि घतार।
आन विरोजो काज मद कर दो मम उद्धार।।
कार्तिक कृष्ण अमावस्या रविवार 26 अक्टूबर 2019 में श्री लक्ष्मी पूजन (दीपावली पर्व मान्य रहेगा) इस वर्ष में चर्तुदर्शी रविवार में 12 बजकर 32 मिनिट तक रहेगी, बाद मे अमावस्या आयेगी। इसलिये दीपावली पर्व चर्तुदर्शी में मनाया जायेगा। रविवार लक्ष्मी पूजन वाले दिन चित्रा नक्षत्र रात्रि 3 बजकर 16 मिनिट तक और विस कुंभ योग 22 बजकर 9 मिनिट तक रहेगा पदम नामक सुयोग में इस वर्ष लक्ष्मी पूजन अच्छा माना जायेगा। चित्रा नक्षत्र मृदु मंत्र संज्ञक होने से सभी तरह के काम काज उद्योग धंधे वालों के लिए शुभ कहा जायेगा। दीपावली लक्ष्मी जी की उत्पति तिथि होने से सभी तरह के काम धंधे वालों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती हैं। 
दीपावली पूजन और दिन के लग्न मुर्हूत…………
कुंभ व्यापारी अपने उद्योग धंधे व्यवसाय प्रतिष्ठान आदि में लक्ष्मी पूजन के लिए धनु लग्न को श्रेष्ठ मानते है। क्योंकि इस लग्न का स्वामी गुरु शुभ गृह है। जोकि सबकी सफलता में सहायक रहते है। धनु लग्न दिन में 10 बजकर 21 मिनिट से 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। ध्यान रहे लग्न में केतु नेष्ठ तो शनि श्रेष्ठ हैं। अत यह मध्यम फल प्रदान करेगा। रविवार  में राहुकाल 16/30 से 18.00 बजे, 9 बजकर 16 मि.से लाभ का चौघडिया 10 बजकर 39 मिनिट में अमृत का चौघड़िया या श्रेष्ठ रहेगा आगे 13/36 से शुभ का चौघड़िया मुर्हूत भी अच्छा जाने। मकर लग्न दीपावली के दिन में ध्यान में 12/25 मिनिट से मकर लग्न कार्य विशेष के लिए उत्तम रहेगी जिसमें शुभ का चौघडिया मुर्हूत कार्यसिद्ध प्रद रहेगा। 
श्री गणेश महालक्ष्मी पूजन………….
कुंभ लग्न दिन में 2 बजकर 9 मिनिट से कुंभ लग्न शुरु होकर 3 बजकर 38 मिनिट तक रहेगी जोकि अपने स्वामी से दृष्ट अत्यंत शुभता प्रदान करेगी। इसमें दीपावली पूजन कुबेर भंडारी पूजन बही खाता पूजन श्रेष्ठ माना जायेगा।
मीन मेष लग्न दोपहर 3 बजकर से सायं 6 बजकर 42 मिनिट तक मीन, मेष लग्न अपने स्वामी से दृष्ट अत्यंत शुभता प्रदान करेगी। मेष गोधूलि लग्न कहलायेगी।
                    धेनु धूरि बेला लगन, सकल सुमंगल मूल,
प्रदोष काल मेष लग्न में भी रहेगी। दीपावली पूजन के लिए अति उत्तम कही जायेगी, प्रदोष समये राजन, कर्तव्या दीप मालिका है। राजन आप पूजनाचार्य यजमान से प्रथम स्वतिवाचन कलश पूजन संकल्प कराकर श्री गणेश, महा लक्ष्मी, रिद्धी-सिद्धी, इंद्र, वरुण, कुबेर भंडारी शक्तियों सहित ब्रम्हा, विष्णु, महेश कुल देवता स्थान देवता सूयादि समस्त गृह मंडल की पूजनार्चन कराये। तदान्तर बही बसना खाता कलम दान, रोकड़ा पूजन एवं अत्याधुनिक उपकरण कम्प्यूटर आदि की सविधि पूजन करने तथा करवाने वाले वर्ष मध्ये लाभो उत्तोत्तर के अवसर होते रहेंगे। नवोदित मेहमान मंगलोत्सव व्यवसाय में उन्नति हर्ष का कारण बनेगी। राज समाज में मकान सम्मान बढेगा। 
दीपावली पूजन ओर रात्रि के लग्न मुर्हूत………
दीपावली की रात्रि बेला में शुभ अमृत और चर के तीन चौघड़िया मुर्हूत सायं 5:36 मिनिट श्रेष्ठ कहे जायेंगे। वृष लग्न सायं 6:43 मिनिट से आरंभ होगी, जिसमें प्रदोष काल का समय आ जायेगा। लग्न पर शुभ गृह गुरु की और बुध की दृष्टि शुभ फल मानी जायेगी। मिथुन लग्न रात्रि 8/39 मिनिट से प्रारंभ होगी जिसमें उच्च का राहु स्वयं विराजमान रहेगा, तो इसे मध्यम फल कारण जाने। कर्क लग्न रात्रि 10/ 53 मिनिट से रात्रि 1/11 मिनिट तक रहेगी। जिस पर शुभ गृह गुरु की दृष्टि शुभ फल प्रद मानी जायेगी। कर्क लग्न में निशिथकाल आ जायेगा।
‘‘निशिथे लक्ष्मयादि पूजनं कृत्यं शुभम’’ यह पूजन के लिये सर्वोत्तम हैं। क्योंकि निशीथ काल में समुद्र मंथन के समय लक्ष्मी जी का प्रार्दुभाव हुआ। इसलिये निशीथ काल को द्विजाचार्य श्रेष्ठ मानते है श्री गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, इंद्र, वरुण, भंडारी, ऋद्धि-सिद्धि, ब्रम्हा, विष्णु, महेश नवगृह देवताओं का पूजन कराकर बहीखाता, कलम आदि का पूजन करने से लक्ष्मी जी की विशेष कृपा होती है। लक्ष्मी के भंडार की बड़ी अपूरब बात, ज्यों खरचे त्यों-त्यों बढ़े बिन खरचे घट जात।
विष्णु प्रिया लक्ष्मी जी आश्रय गृहणार्थ सभी गृहस्थ, दुकान, कारखाना, उद्योग ऑफिस स्टोर आदि का निरीक्षण करती है। किसके घर में कितनी स्वच्छत है किसने कितना घर सजाया है। कहां निवास करु अथवा कहां निवास न करु और यह भी  देखती है। कि कौन मेरी भक्ति में संलग्न है। 
‘‘अर्ध रात्रे ममत्येव लक्ष्मी राक्षथितुं गृहान, अत स्वलं कृता लिपता दीपै जाग्नि जनोत्सवा, माता लक्ष्मी को जहां-जहां अच्छा लगता है। वही ठहर जाती है। इसलिए मनुष्य अलंकारों से युक्त तथा पुष्प मालादि केला खंभों से सुशोभित दीप की पूजा चंदन लगाकर दीपकों को उजाले में उत्सव करते हुए जागते रहना चाहिए।
                                इति शुभम्
 

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