लखनऊ में दिखा CM योगी के अपील का असर, दिवाली में कम रहा वायु प्रदूषण

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील का असर सोमवार को देखने को मिला, राजधानी लखनऊ में दीपावली के अगले दिन प्रदूषण का स्तर पिछले साल की तुलना में काफी कमी रिकॉर्ड की गई. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह रही कि लोगों ने पटाखों से दूरी बनाए रखी. राजधानी के लोगों ने कम मात्रा में पटाखे चलाएं जिसका नतीजा यह हुआ कि अगले दिन वायु प्रदूषण का स्तर पिछले साल की तुलना में कम रहा.
प्रदूषण के कारण ही योगी सरकार ने भी दीपावली पर महज 2 घंटे तक ही पटाखे छुड़ाने के निर्देश दिए थे. लोगों ने भी अपने मुख्यमंत्री की बात को पूरा माना और राजधानी में पटाखे सबसे कम जलाए गए. इसके अलावा यूपी सरकार ने सभी जिलों के अधिकारियों को यह दिशा निर्देश जारी किए थे कि रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक ही लोगों को पटाखे जलाने की इजाजत दी जाए. इसके अलावा लाइसेंस धारक पटाखा विक्रेताओं से ही बिक्री कराई जाए.
दरअसल वायु प्रदूषण को मापने वाली संस्था सीपीसीबी (CPCB) लखनऊ के चार स्टेशनों पर वायु प्रदूषण की ऑनलाइन निगरानी करता है. जिसमें गोमती नगर, अलीगंज, लालबाग के अलावा तालकटोरा औद्योगिक क्षेत्र का इलाका शामिल रहता है. रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार की सुबह अधिकतम PM 2 का लेवल 334 रिकॉर्ड किया गया इसके अलावा O3 का लेवल 7 रिकॉर्ड किया गया. NO2 अधिकतम सीमा राजधानी लखनऊ में 32 मापी गई. इसके अलावा SO2- 4 और CO- 13 रिकॉर्ड किये गए..
न्यूज18 से बातचीत में कई लोगों ने इस बात को कहा कि हमें ही वायु प्रदूषण को झेलना पड़ता है इसलिए हम लोगों ने इस बार कम पटाखे जलाए और नतीजा यह हुआ कि हम लोग बेहतर हवा में सांस ले पा रहे हैं. तो इसे लोगों की जागरूकता कहिए यह सरकार की इच्छाशक्ति कि लोगों ने इस बार पटाखे पिछले साल की तुलना में कम चलाएं.
बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को संज्ञान में लेते हुए 2018 में दिवाली पर पटाखे जलाए जाने के लिए समय निर्धारित कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुसार, रात के 8 से लेकर 10 बजे तक ही पटाखे चलाए जाने की अनुमति दी गई थी. 10 बजे के बाद पटाखे चलाना प्रतिबंधित होगा. कोर्ट ने 2017 में 2016 की तुलना में पटाखे बेचने के लिए केवल 20 प्रतिशत लाइसेंस जारी करने के आदेश दिए थे.
