DHFL-PF घोटाला: सपा और कांग्रेस हुई हमलावर तो उर्जा मंत्री बोले- अखिलेश राज में रखी गई भ्रष्टाचार की नींव

लखनऊ. यूपी पॉवर कारपोरेशन (UP Power Corporation) में पीएफ (Provident Fund) के पैसों को लेकर हुए भ्रष्टाचार पर सूबे की सियासत भी गरमा गई है. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) के तीखे हमले के बाद रविवार शाम सरकार के प्रवक्ता और उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा (Shrikant Sharma) ने पलटवार किया मंत्री ने कहा कि पीएफ की राशि निजी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में निवेश करने में हुई गड़बड़ी की नींव अखिलेश सरकार में रखी गई.
एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए श्रीकांत शर्मा ने कहा कि यूपीपीसीएल ट्रस्ट की भविष्य निधि की जीपीएफ और सीपीएफ में हुए घोटाले में एफआईआर और गिरफ्तारी की गई है. आखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा आप बिना होमवर्क किए बोलते हैं, जिनके घर शीशे के होते हैं वो दूसरे के घर मे पत्थर नहीं फेंकते. शहजादी कि बात नहीं करते, वो वही कर रहीं हैं, जो शहजादे कर रहे थे. वे बस ट्विटर तक ही सीमीत हैं.
अखिलेश राज में रखी गई भ्रष्टाचार की नींव
श्रीकांत शर्मा ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा 'भ्रष्टाचार के लिए तो सुरंग आपने 2014 में पहले ही बना दी थी. ये आपका ही फैसला था, इसका जवाब अखिलेश जी को देना चाहिए. आपने 2014 में जो रैकेट आपने लूट के लिए तैयार किया था वो लगातार काम कर रहा था, क्या वो आपके इशारे पर काम कर रहा था? क्या लूट की छूट आपने दे रखी थी? आपकी क्या भूमिका थी?"
अखिलेश का आरोप बीजेपी ने डिफाल्टर कंपनी से लिया 20 करोड़ का चंदा
इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने डिफाल्टर कंपनी डीएचएफसीएल से 20 करोड़ का चंदा लिया. उन्होंने उर्जा मंत्री से पूछा कि बिजली कर्मियों के हक़ का पैसा डिफाल्टर कंपनी में लगाने की मेहरबानी के पीछे क्या रहस्य है?
कांग्रेस ने की उर्जा मंत्री के बर्खास्तगी की मांग
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने डीएचएफएल घोटाले में ऊर्जा मंत्री, चेयरमैन और एमडी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को बर्खास्त करें. बिजली विभाग के 2600 करोड़ का घोटाला यूपी की बीजेपी सरकार के चाल, चरित्र और चेहरे को दर्शाता है. 10 जुलाई को घोटाले की शिकायत हुई लेकिन 14 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. प्रियंका गांधी के ट्वीट के बाद कार्रवाई हुई. बगैर सीएम के कैबिनेट अप्रूवल के बिना इतना बड़ा फैसला कैसे लिया गया. इस मामले की शुरुआत सपा सरकार में हुई. इस मामले में ऊर्जा मंत्री, चेयरमैन और एमडी की क्या भूमिका है. सीएम ने अब तक ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को बर्खास्त क्यों नहीं किया? डीएचएफएल ने चुनाव में बीजेपी को 20 करोड़ का चंदा दिया. डीएचएफएल के लोग ऊर्जा मंत्री के दफ्तर और घर आते जाते रहते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिजली विभाग के कर्मचारियों की लड़ाई लड़ेगी.
