शहरी निकाय चुनावों के नतीजों ने लगाई गहलोत सरकार के कामकाज पर मुहर, हुई गवर्नेंस मॉडल की जीत

जयपुर. शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं. इस जीत को कांग्रेस सरकार की जीत के साथ- साथ सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के गवर्नेंस मॉडल (Governance model) की जीत माना जा रहा है. शहरी निकायों के चुनाव में कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) दोनों ने शहरों के लिए घोषणा- पत्र जारी किए थे, लेकिन प्रदेश की जनता ने कांग्रेस के घोषणा- पत्र पर ज्यादा विश्वास जताया. गहलोत सरकार के 11 महीने के कामकाज पर जनता ने इन नतीजों के जरिए अपना मेनडेट दे दिया है. कांग्रेस पार्टी में इसे गहलोत मॉडल की जीत बताया जा रहा है.
कांग्रेस सरकार की जनता में बढ़ती क्रेडिबिलिटी से जोड़कर देख रहे लोग
तमाम अटकलों को खारिज करते हुए जनता ने इन निकाय चुनावों में गहलोत के मॉडल को पसंद किया है. इसे कांग्रेस सरकार की जनता में बढ़ती क्रेडिबिलिटी से भी जोड़कर देखा जा रहा है. शहरी निकाय चुनावों की जीत ने सीएम अशोक गहलोत का कद तो बढ़ाया ही है, कांग्रेस सरकार के 11 महीने के कार्यकाल और इसके गवर्नेंस मॉडल को भी ग्रीन सिग्नल दिया है. सत्ता समीकरणों के लिहाज से यह जीत बहुत मायने रखने वाली है. राजनीतिक रूप से भी यह जीत बहुत कुछ कहती है.
बीजेपी के लिए अलार्मिंग संदेश
इन चुनावों में जनता ने राम मंदिर, अनुच्छेद 370 जैसे भाजपा के मुद्दों को परे रखकर कांग्रेस को समर्थन दिया, जिसके गहरे सियासी मायने हैं. इन नतीजों ने बीजेपी के लिए अलार्मिंग सिग्नल दे दिया है. इससे यह भी साबित हो गया है कि गहलोत का गवर्नेंस और पॉलिटिक्स दोनों मॉडल फिलहाल जनता की निगाहों में सही हैं.
