1100 साल से भी ज्यादा पुराना है अंकोरवाट मंदिर 213 फीट ऊंचा है इसका शिखर,इस खबर के जरिए देखिए इस प्राचीन मंदिर की और भी सुंदर गाथाएं..

बता दें, के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के अनुसार अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए और उनका कहना है कि मंदिर एक बार बनना है इसलिए इसकी विशालता और भव्यता का ध्यान रखा जाना जरूरी है। अंकोरवाट कंबोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है और जो करीब 162.6 हेक्टेयर में फैला है। इसे मूल रूप से खमेर साम्राज्य में भगवान विष्णु के एक हिंदू मंदिर के रूप में बनाया गया था। यह मन्दिर मेरु पर्वत का भी प्रतीक है। मीकांग नदी के किनारे सिमरिप शहर में बना यह मंदिर आज भी संसार का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है।
अंकोरवाट का इतिहास-
बताया जाता है की यह मंदिर वर्तमान कंबोडिया का प्राचीन नाम कंबुज था और वहां खमेर साम्राज्य था। खमेर भाषा में अंकोर शब्द का अर्थ राजधानी होता है और अंकोर शब्द संस्कृत के नगर शब्द से बना है, इसलिए अंकोर नाम का महानगर खमेर साम्राज्य की राजधानी रहा। खमेर साम्राज्य लगभग 9वीं शताब्दी से 15वीं शताब्दी तक अपने उत्कर्ष पर था। अंकोर महानगर में वर्ष 1010 से 1220 तक के काल में बहुत बड़ी संख्या में लोग रहते थे। आज इसी जगह अंकोरवाट का मंदिर स्थित है, जो कम्बोडिया का लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। अंकोर नगर के अवशेष श्याम रीप (सिमरिप) नामक आधुनिक नगर के दक्षिण में जंगलों और खेतों के बीच है और अंकोर क्षेत्र में करीब 1000 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं।
अंकोरथोम और अंकोरवाट नगर-
अंकोरथोम और अंकोरवाट प्राचीन कंबुज की राजधानी है। मान्यताओं के अनुसार इस राज्य का संस्थापक कौंडिन्य ब्राह्मण था जिसका नाम वहां के संस्कृत अभिलेख में मिलता है। 9वीं शताब्दी में जयवर्मा तृतीय कंबुज का राजा बना और उसी ने लगभग 860 ईस्वी में अंकोरथोम नाम से अपनी राजधानी की शुरुअात की जो करीब 40 सालों तक बनती रही और करीब 900 ईस्वी के आसपास तैयार हुई। इसके निर्माण के संबंध में कंबुज साहित्य में कईं घटनाएं भी मिलती हैं। अंकोरथोम नगर के ठीक बीच में एक विशाल शिव मंदिर था। जो कई शिखरों से मिलकर बना हुआ था। इनमें समाधि में बैठे शिव की मूर्तियां स्थापित थीं। आज का अंकोरथोम एक विशाल नगर का खंडहर है।
मंदिर के शिलाचित्रों में बताई गई है रामकथा-
वहीं,अंकोरवाट मंदिर बहुत विशाल है और यहां के शिलाचित्रों में रामकथा बहुत संक्षिप्त रूप में है और इन चित्रों में रावण वध से शुरुआत हुई है। इसके बाद सीता स्वयंवर का दृश्य मिलता है। इन दो प्रमुख घटनाओं के बाद विराध एवं कबंध वध का चित्रण है।
लेकिन फिर अगले शिलाचित्रों में भगवान श्री राम स्वर्ण मृग के पीछे दौड़ते हुए, सुग्रीव से श्रीराम की मैत्री, बाली-सुग्रीव युद्ध, अशोक वाटिका में हनुमान, राम-रावण युद्ध, सीता की अग्नि परीक्षा और राम की अयोध्या वापसी के दृश्य देखने को मिलते हैं। इस अंकोरवाट मंदिर के गलियारों में तत्कालीन सम्राट, बलि-वामन, स्वर्ग-नरक, समुद्र मंथन, देव-दानव युद्ध, महाभारत, हरिवंश पुराण इत्यादि से संबंधित अनेक शिलाचित्र भी दिखाई देते हैं।
