इस भाई को सलाम, जिसने खोखा लगाकर चाय बेची और बड़ी बहन को क्रिकेट के मैदान तक पहुंचाया

भाई ने अपने सपनों को अहमियत न देकर अपने बहन की ख्वाहिशों को अहमियत दी। भाई के इस त्याग की वजह से आज बहन अपने सपने को पूरा कर रही है। अपने परिवार का नाम भी रोशन कर रही है, यह कहानी है छाया चौहान की। छाया छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की क्रिकेट टीम की सदस्य है और टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छाया एचएयू में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय अंतर विश्वविद्यालय महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में खेल रही है। मंगलवार को खेले गए मैच में भी छाया ने तीन विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई।
पिता भी नहीं रहते साथ में
छाया के मुताबिक उसके पिता भी उनके साथ नहीं रहते। उसकी मां रीना व छोटा भाई धीरज ही घर चलाते हैं। मां हॉस्टल में खाना बनाती हैं तो भाई ने खोखे में छोटी सी दुकान कर रखी है। हालांकि वह भी मेहंदी लगाकर व सिलाई कर घर खर्च में उनकी मदद करती है। मां व भाई ने ही उसके क्रिकेट खेलने के सपने को पूरा किया है। उनका खुद का मकान भी नहीं है। कानपुर में स्टेडियम के साथ लगती खाली जगह पर ही उन्होंने एक झोपड़ी बना रखी है, जिसे प्रशासन द्वारा बार-बार तोड़ भी दिया जाता है।
लड़कियों को क्रिकेट खेलते हुए देख किया फैसला
छाया ने बताया कि वहां जहां रहती है, उसके पास ही स्टेडियम है। वह स्टेडियम में लड़कियों को क्रिकेट खेलते हुए देखती थी, तो उसने क्रिकेट खेलने का फैसला किया। जब उसने इस बारे में अपनी मां को बताया तो उन्होंने व छोटे भाई ने पूरा सहयोग किया। वह चार साल से क्रिकेट खेल रही है। जब कभी पैसे की जरूरत होती है तो मां व भाई ही पैसे देते हैं, चाहे उन्हें कहीं से भी इंतजाम करना पड़े। इसके अलावा उसके कोच शरद पांडे ने भी काफी मदद की है।
रणजी का कैंप भी लगा चुकी है छाया
छाया के मुताबिक इसी वर्ष उसे उत्तर प्रदेश की अंडर-23 की टीम में बतौर अतिरिक्त खिलाड़ी के तौर पर चुना गया था। इसके अलावा इसी वर्ष उसने रणजी का कैंप भी लगाया था। छाया ने बताया कि वह सुबह चार घंटे व शाम को तीन घंटे अभ्यास करती है। महिलाओं में मिताली राज व पुरुषों में रविंद्र जडेजा उसके पसंदीदा खिलाड़ी हैं।
