रेडीमेड कपड़ा निर्माताओं को 200 करोड़ का नुकसान
भोपाल । इंदौर के रेडीमेड कपड़ा निर्माताओं को 200 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो गया। यह नुकसान बीते 63 दिनों से जारी लाकडाउन के कारण हुआ है। बीते 6 मार्च को शहर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के मेले में खाड़ी देशों सहित देश के कई प्रदेशों से रेडीमेड कपड़ों के ऑर्डर मिले थे, लेकिन 24 मार्च को लॉकडाउन लगने से वे रदद हो गए। अब कारखानों में तैयार कपड़े व कच्चा माल पड़ा है जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है। ईद के कारण इंदौर में बने कपड़ों की डिमांड दक्षिण भारत और दुबई में काफी रहती है और ज्यादातर ऑर्डर भी इस त्योहार को लेकर ही आए थे। कारोबारियों के अनुसार ईद पर कुर्ता-पाजामा पैटर्न, एंब्रायडरी वर्क ज्यादा बिकता है। हर साल की तरह फरवरी से ही कारखानों में इसकी तैयारियां शुरू कर कपड़ा खरीद लिया गया था। शहर में लगे मेले में दक्षिण भारत के 300 से ज्यादा व्यापारी आए थे और उन्होंने ऑर्डर बुक कराए थे। इसे पूरा करने के लिए रात-दिन कारखानों में कारीगर जुटे हुए थे, लेकिन डिलिवरी होने से पहले ही लॉकडाउन हो गया।
लॉकडाउन हटने के बाद मार्केट में कपड़ों की डिमांड भी बढ़ेगी, लेकिन त्योहार और शादियों के लिए फैंसी ड्रेस ज्यादा चलती है। उनकी डिमांड अब अगले साल ही रहेगी। स्टॉक को मार्केट में खपाने के लिए इस साल सेल ज्यादा लग सकती है। ईद और अक्षय तृतीया के सीजन में नुकसान होने के बाद रेडीमेड कारोबारी अब दिवाली को लेकर जोखिम नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में दिवाली पर भी कारोबार फीका रहेगा। इस बारे में मप्र रेडीमेड व्यापारी संघ के अध्यक्ष शांतिप्रिय डोसी का कहना है कि ईद और लग्नसरा में रेडीमेड कपड़ों की सबसे ज्यादा बिक्री होती है। ईद के लिए इंदौर के रेडीमेड कारखानों में फरवरी से रेडीमेड कपड़े बनाने का काम शुरू हो गया था। अब कारखानों में कपड़े बनकर तैयार है। करोड़ों का कच्चा माल भी पड़ा है। आने वाली दिवाली पर भी संशय के बादल छाए हुए हैं। वहीं इंदौर रेडीमेड व्यापारी संघ अध्यक्ष आशीष निगम का कहना है कि अप्रैल और मई में शादी और ईद को देखते हुए रेडीमेड कपड़े बनाने के ऑर्डर मिले थे। मार्च के पहले सप्ताह में शहर में लगे मेले में दुबई से भी ऑर्डर मिले थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण 200 करोड़ के ऑर्डर रद हो गए। इससे कारोबारियों को बड़ा नुकसान हुआ है।
