सीजी एजुकेशन फोरम ने की कोचिंग सेंटर खोले जाने की मांग

बिलासपुर । लॉक डाउन के दौरान 25 मार्च से सभी शैक्षणिक संस्थाएं और कोचिंग सेंटर बंद है इस दौरान इन संस्थाओं ने ऑनलाइन क्लास चलाने की कोशिश की लेकिन वह प्रभाव नहीं पैदा हो पाया करीब 75 दिन से कोचिंग सेंटर पर ताला जड़े होने से अब मुश्किलें बढऩे लगी है यह आजा सोमवार को सीजी एजुकेशन फोरम जोकि छत्तीसगढ़ प्रदेश में संचालित कोचिंग कक्षा व कंप्यूटर ट्रेनिंग संचालकों का संघ है ,के द्वारा बिलासपुर शहर के जिला कलेक्टर , बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे एवं सांसद बिलासपुर अरुण साव को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें कोचिंग क्लासेस व कंप्यूटर सेंटर संचालकों की समस्या के संबंध मैं उन्हें अवगत कराया गया
ज्ञापन में कहा गया कि ये सभी संस्थाएं असंगठित क्षेत्र की संस्थाएं हैं । तथा संस्थाओं में शिक्षक, परीक्षक, काउंसलर चपरासी, गार्ड आदि कार्यरत हैं वर्तमान में कोरोना काल संपर्क में उपरोक्त संस्था विगत 80 दिनों से बंद है कर्मचारी के मध्य जीवन यापन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है । संस्था स्वरोजगार कि श्रेणी में आती है जो कि पूर्णत: प्राइवेट संस्थाओं के संचालकों, कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की कोई सरकारी वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं है । संस्थाओं में 99त्न किराए के मकान में संचालित होती है तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रत्येक शहरों में कस्बों में प्रत्येक गलियों में प्राइवेट व्यक्तियों द्वारा संचालित है जिसमें हजारों लोग को स्वयं का रोजगार प्राप्त है। जिसमें उनके परिवार को खर्चा चलता था अब उनको मकान किराए, बिजली बिल, सैलरी एवं अन्य पेमेन्ट की समस्या उत्पन्न हो गई है । स्टूडेंट्स भी संस्थान खुलने का इंतजार कर रहे हैं । बहुत से स्टूडेंट्स रोजगारमूलक कोर्स करके रोजगार प्राप्त करते थे अब वो भी बेरोजगार बैठे हैं।
शासन द्वारा लगभग सभी व्यवसाय धीरे-धीरे प्रारंभ हो रहे हैं ऐसे में शासन से अपेक्षा जाहिर की गई कि इन संस्थाओं को भी प्रारंभ करने की इजाजत दी जाए बिलासपुर के कोचिंग सेंटर को खोलने की इजाजत मांगने के साथ संस्था प्रमुखों ने वादा किया कि कोचिंग सेंटर संचालन के दौरान वे सभी नियमों का पालन करेंगे, जैसे कि  सिर्फ 15 साल से बड़े बच्चो को पढ़ाएंगे सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करेंगे।  सेनेटाइजेसन , मास्क आदि का उपयोग करते हुए सुरक्षा का ध्यान रखेंगे ।
संस्थानों ने ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रदान करने का भी प्रयास किया लेकिन ये प्रयास बहुत से कारणों से सफल नही हो पा रहे  सभी विद्यार्थियों के पास मोबाइल/कम्प्यूटर इंटरनेट आदि की सुविधा नही है।
स्टूडेंट ऑनलाइन पढऩे में रुचि नही लेते
शासन द्वारा भी छत्तीसगढ़ बोर्ड की ऑनलाइन कक्षाएं प्रारंभ की गई किंतु ग्रामीण में विद्यार्थियों के पास कंप्यूटर मोबाइल न होने से वो इसे अटेंड नही कर सके। कलेक्टर के साथ बिलासपुर विधायक और सांसद ने कोचिंग सेंटर संचालकों की बातों को सुनने के बाद उन्हें आश्वस्त किया है कि वे उच्च स्तर पर इस संबंध में चर्चा करेंगे । हालांकि शैक्षणिक संस्थाओं को खोलने या ना खोलने की इजाजत केंद्र और राज्य सरकार दे सकती है । इस दिशा में 1 जुलाई से स्कूल खुलने की बात शुरू में कही गई थी लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इससे भी कदम पीछे हटा लिए गए हैं। ऐसे में अगर सरकार कोचिंग सेंटर खोलने की इजाजत दे भी दे तो बड़ा सवाल यही है कि क्या विद्यार्थी आएंगे भी, क्योंकि पेरेंट्स बच्चों को फिलहाल स्कूल कॉलेज और कोचिंग सेंटर भेजने को तैयार नहीं दिख रहे।

Leave a Reply