कमलनाथ सरकार के घोटालों के आगे नतमस्तक हुई शिव सरकार.

भोपाल।मार्च के महीने में बड़े नाटकीय ढंग से गिराई गई कमलनाथ सरकार के अंतिम 6 महीने के कार्यकाल को शिवराज सरकार ने घोटाले का रिकॉर्ड बताया था और उसकी जांच करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया था लेकिन अचानक यह विशेष समिति भंग कर दी गई।अब जांच के नाम पर कुछ नहीं होगा ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है ।उनकी इस घोषणा को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं आम है। कहा जा रहा है कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों के भी घोटाले इसमें उजागर हो रहे थे इसके चलते उन्हीं मंत्रियों को उस कमेटी में रखना उचित नहीं था इसी वजह से पूरी समिति ही भंग कर दी गई और कमलनाथ सरकार के घोटालों के आगे शिव सरकार नतमस्तक हो गई।
 वर्तमान शिवराज सरकार अब पिछली कमलनाथ सरकार के छह माहों में लिये गये निर्णयों की जांच नहीं करेगी। इस हेतु गठित किया गया मंत्री समूह विघटित कर दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि शिवराज सरकार ने गत 13 मई 2020 को एक मंत्री समूह गठित किया था जिसे 20 मार्च 2020 से छह माह की पूर्व की अवधि में कमलनाथ सरकार द्वारा लिये गये विभिन्न निर्णयों की समीक्षा कर अवगत कराना था। इस मंत्री समूह में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलवाट एवं कृषि मंत्री कमल पटेल शामिल थे। लेकिन अब ढाई माह बाद इस मंत्री समूह को विघटित कर दिया गया है और इसे गठित करने का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने निरस्त कर दिया है।
राजस्व आया बढ़ाने वाला मंत्री समूह भी विघटित :
इसी प्रकार, शिवराज सरकार ने 13 मई 2020 को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा, आदिवासी कल्याण मंत्री मीना सिंह एवं मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का एक मंत्री समूह गठित किया था जिसे कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरुप राज्य के कर एवं गैर कर राजस्व में होने वाली संभावित कमी का आंकलन करने, राजस्व प्राप्ति से संबंधित अनुबंध जिनका निष्पादन हो चुका है अथवा होना है, के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं के निवारण तथा राजस्व आय को बढ़ाये जाने के संबंध में समीक्षा कर उपाय प्रस्तुत करना था। इस मंत्री समूह को अब विघटित कर दिया गया है।
ये हैं कारण :
पिछली कमलनाथ सरकार के छह माहों के निर्णय के लिये मंत्री समूह के गठन के आदेश के बाद सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक मंत्रिपरिषद में लिये गये हैं। ये लोंग कमलनाथ सरकार में भी मंत्री थे और इन्होंने भी इन छह माहों में कई निर्णय लिये थे। ऐसे में इनके खिलाफ ही जांच हो रही थी। फिर राजस्व आय बढ़ाने वाले गठित मंत्री समूह आम बजट का अध्यादेश आने के बाद गैर जरुरी हो गया था।

Leave a Reply