6 माह बाद बच्चे आज से जाएँगे स्कूल, कोराेना की भी दहशत

शहर में कोरोना का कोहराम मचा हुआ है और स्कूल शिक्षा विभाग विद्यार्थियों की जान से खिलवाड़ कर उन्हें स्कूल बुला रहा है। आज से 50 फीसदी क्षमताओं के साथ 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने के लिए स्कूल बुलाया जा रहा है, लेकिन ये सारी कवायदें सरकारी स्कूलों भर के लिए हैं। फिलहाल प्राइवेट स्कूल विद्यार्थियों को नहीं बुला रहे हैं वे ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए नियमित कक्षाएँ लगा रहे हैं।

स्कूल खुलने को लेकर बच्चों और अभिभावकों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। मॉडल हाईस्कूल, एमएलबी सहित शहर के सभी सरकारी स्कूल शनिवार को सेनिटाइज कराए गए हैं। प्राचार्यों का कहना है कि शासन की गाइडलाइन के मुताबिक रोजाना स्कूल सेनिटाइज कराना है जो कि उनके लिए असंभव है। विद्यार्थियों को सिर्फ 1 घंटे के लिए स्कूल बुलाया जाएगा। जहाँ एक कक्षा में 60 विद्यार्थी बैठा करते हैं वहीं अब सोशल डिस्टेंसिंग के साथ 20 ही बैठा करेंगे।

विभाग ने यह भी निर्देश जारी किया है कि छात्र और शिक्षक मास्क पहनेंगे, साथ ही सेनिटाइजर की छोटी बोतल अपने पास रखेंगे। अब सोचने वाली बात ये है कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों में गरीब तबके के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं लॉकडाउन में रोजीरोटी छिनने से उनके मातापिता उन्हें दो टाइम का भोजन भी नहीं करा पा रहे, ऐसे में सेनिटाइजर की बोतल खरीद कर देना कहाँ तक संभव होगा।

कोरोना में स्कूल खुलने से शिक्षकों के बीच भय का माहौल है। विद्यार्थियों को पूरे समय मास्क लगाने बाध्य करना उनके लिए मुश्किल होगा। बच्चों को पानी साथ लाने कहा जा रहा है। सभी शासन की इस लापरवाही की घोर निंदा कर रहे हैं। स्कूलों में एक दिन 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को तो दूसरे दिन 9वीं 10वीं के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने हेतु बुलाया जाएगा। यही क्रम आगे चलेगा। स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों को घर बैठे मुफ्त की तनख्वाह नहीं देना चाहता, इसलिए विद्यार्थियों की जान को जोखिम में डालकर स्कूल बुलाया जा रहा है।

 

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