कोरोना संक्रमण के बीच मनाई गई दीपावली
जबलपुर। धन धान्य की देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणेश व भण्डार के अधिष्ठाता भगवान कुबेर की पूजा अर्चना का महापर्व दीपोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजा हो या रंक, सभी अपनी-अपनी हैसियत के अनुरूप दीवाली की खुशियां बांटी। हालंाकि इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से दीपावली का रंग कुछ फीका नजर आया। कोरोना संक्रमण की दहशत के बीच भी दीपावली का पर्व उत्साह एवं उमंग के साथ मनाया गया। संस्कारधानी में परम्पराओं से जुड़ा यह त्यौहार अपनी वैभवता के अनुकूल पूर्ण खुशहाली के साथ मनाया गया। शहर का हर बाजार (बड़ा अथवा छोटा) धनतेरस के पूर्व से ही जगमग था और आईटमों की नवीनता से चकाचौंध। खरीदी का बाजार मंहगाई से प्रभावित नजर आया, लोगों ने औपचारिक खरीददारी की, फल पूसल मीठा, नमकीन, पूजन सामग्री सबकुछ इतना मंहगा था कि आम आदमी के बस के बाहर था। लोगों ने घर की खुशियां बांटने के लिये औपचारिकताएं ज्यादा की। इसके बावजूद नगर और उपनगरीय क्षेत्र के बाजारों में खरीदी चली। ज्वेलरी, बर्तन, गारमेंट्स और फिर पटाखों की खरीदी ने कल्पना के अनुरूप नये रिकार्ड नहीं बना सकी। पटाखों के दाम आसमान पर रहे, इसलिए कम बिक्री हुई। दुकानदारों के चेहरे मायूस थे। मिठाई की मिठास ने विचलित किया। लोगों ने अपने प्रतिष्ठानों को बढिय़ा तरीके से रोशन किया। प्रतिष्ठानों की दहलीज जगमग दियों से रोशन हुई। पटाखों की आवाजें भी गूंजी।
खास दीवाली के दिन आलम ही निराला था। इस दिन आतिशबाजी की दुकानों में जमकर खरीदी हुई। शाम के समय समृद्धि की देवी लक्ष्मी जी के पूजन के बाद कारोबारी दुकानों में भी परम्परा के अनुसार पूजन किया गया और मिष्ठान का वितरण करने के बाद जमकर आतिशबाजी की गई। हर मुख्य बाजारों की सड़कों पर आतिशबाजी के नजारे देखते ही बनते थे। आतिशबाजी के आईटम इतनी नवीनता लिये हुये थे कि बरबस उनकी बहुरंगी छटा अपनी ओर खींच रही थी। जमीनी आईटम हो या फिर आसमान में छटा बिखरने वाले आईटम हों, उनकी विविधता ने मन मोहा। हर गली वूसचे, आंगन में पटाखों की गूंज थी और निराली। छोटे से लेकर बड़े-बड़े भी आतिशबाजी में मगन थे। हर्ष, उल्लास और वैभव का यह पर्व अपनी पूर्ण गरिमा के साथ मनाया गया। दीवापली की रात जमकर जुआं चला। सभ्य परिवारों में जुएं की इस परम्परा की रस्म निभाई गई। घर के सदस्यों की बीच कुछ देर के लिये यह खेल खेला गया। लेकिन जुआंडिय़ों और जुआं को जुआं जैसा खेलने वालों की भी कमी नहीं रही। बाकायदा फड़ जमे और लाखों के वारे-न्यारे भी हुये।
