विधानसभा के शीतकालीन सत्र का रोड़ा बना कोरोना

भोपाल। मप्र में शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले हुए कोरोना विस्फोट से विधानसभा प्रबंधन सकते में है। शीतकालीन सत्र को देखते हुए सभी कर्मचारियों का टेस्ट कराया गया था। इसमें काफी संख्या में विधायक विश्राम गृह के कर्मचारियों की भी है जहां विधायक या उनके साथ आने वाला स्टाफ रुकता है। शनिवार को भी 16 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव आ गए हैं। इस तरह 77 कर्मचारियों में से अब तक विधानसभा के 50 कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। शुक्रवार को भी 55 लोगों का और टेस्ट हुआ था।
इधर, शुक्रवार को सत्र से दो दिन पहले आई रिपोर्ट में विधानसभा के 34 कर्मचारी कोरोना संक्रमित निकले हैं। पहले इनका रैपिड एंटीजन टेस्ट हुआ, इसके बाद आरटी-पीसीआर भी कराई गई। शुक्रवार को भी 55 लोगों का और टेस्ट हुआ था। एमएलए रेस्ट हाउस स्थित नया पारिवारिक खंड 1-2-3 में अब कुल 50 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा और विधानसभा सचिव एपी सिंह सहित 40 लोगों का कोरोना टेस्ट कराया गया है। बता दें कि 28 दिसंबर यानि सोमवार से विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है।
– सरकार सत्र टालने की कोशिश में
इधर पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने शिवराज सरकार पर आरोप लगाया कि वह विधानसभा सत्र को टालने की कोशिश कर रही है। विधानसभा के 34 कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने को लेकर शर्मा ने कहा कि सिर्फ एक युवती ही कोरोना पॉजिटिव आई है। बाकी सभी आउटसोर्स कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
पीसी ने आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र ना चले इसलिए ये सब साजिश के तहत किया जा रहा है। पहले 22 दिसंबर से विधानसभा सत्र होना था। लेकिन प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा और सरकार ने षडय़ंत्र कर इसको कम किया है। सप्ताह भर फाइल को घुमाया गया। क्योंकि सरकार विधानसभा में चर्चा करने से डर रही है। विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव टालना चाहती है। ये अध्यादेश की सरकार है। भारत में पहली बार है जब रूक्क में अध्यादेश के जरिए बजट पास किया गया, जो कि विधायकों के अधिकारों का हनन है।
-अब तक दो सत्र हुए, दूसरी बार केवल 9 मिनट चला सेशन
सरकार ने अभी तक दो दिन बैठक की, जिसमें 24 से 27 मार्च तक चार दिन में दो बैठक 1 घंटे 26 मिनिट और दूसरा 21 से 23 सितंबर तीन दिन तक चले विधानसभा सत्र के दौरान हुई बैठक में चर्चा केवल 9 मिनिट हुई। शर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विधायकों की आवाज को दबाना चाहती है। अध्यक्ष का काम होता है कि विपक्ष का संरक्षण करें विधानसभा का संरक्षण करें बजाय इसके ये सत्ता पक्ष के हिसाब से निर्णय ले रहे है।
देश के इतिहास में पहली बार मध्य प्रदेश में अध्यादेश से बजट पारित हुआ है। बजट हमेशा विधानसभा में पेश होकर चर्चा करने के बाद पारित होता था। शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि उपचुनाव में जो मंत्री चुनाव हार गए है कैबिनेट में उनको बुलाया जाता है, सरकार पूरी तरह से संविधान को चौपट करने में तुली है। भाजपा पहले लव जिहाद के नाम पर अब धर्म स्वतंत्र विधेयक ये कानून 1968 में बन गया था बाबा साहब आंबेडकर ने सभी बातों को उल्लेख था, लेकिन भाजपा सरकार भटकाने का काम करती है इसलिए इस कानून के जरिए भाजपा विधानसभा सत्र को भी भटकाने का काम करेंगी।

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