दो साल बाद भी ‎किसानों को नहीं मिले 30 करोड़

भोपाल । प्रदेश के हजारों ‎किसानों को प्याज भावांतर योजना के 30 करोड रुपए का भुगतान नहीं ‎किया गया है। ‎किसानों ने दो साल पहले प्याज बेचा था। इस पर राज्य सरकार ने भावांतर योजना का लाभ ‎किसानों को देने का भरोसा ‎दिलाया था। किसानों को उनकी फसल के उचित दाम न मिलने पर राज्य सरकार भावांतर योजना लेकर आई थी। दो साल पहले इस योजना के तहत प्याज की खरीदी की गई थी, लेकिन इंदौर जिले के सात हजार किसान ऐसे हैं जिनको इस योजना के 30 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं। किसान मंडी से लेकर उद्यानिकी और कृषि अधिकारियों के पास कई बार जा चुके हैं, लेकिन उनके पास भी इसका स्पष्ट जवाब नहीं है। कहा जाता है कि शासन की ओर से भेजा जाएगा, तभी मिल पाएगा। भारतीय किसान एवं मजदूर सेना का कहना है कि वे इस मामले को लेकर 4 जनवरी को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें संगठन पदाधिकारियों के साथ ही किसान भी मौजूद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि तीन-चार साल पहले सरकार यह योजना लेकर आई थी। उस समय भी भावांतर योजना में प्याज खरीदा गया था। तब कुछ जिलों में खरीदी में घपले भी सामने आए थे। किसानों के नाम पर व्यापारियों का माल खरीदने के मामले सामने आए थे जिसकी जांच भी की गई थी, लेकिन बाद में इस पर लीपापोती हो गई। मालूम हो ‎कि  मध्यप्रदेश के मालवा और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है। देश में प्याज की कम पैदावार होने पर तो दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन अधिक पैदावार होने पर दाम दो रुपये किलो पर भी आ जाते हैं। किसानों को इस मुसीबत से बचाने के लिए राज्य सरकार ने भावांतर योजना के तहत प्याज प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया था। इसके तहत प्याज के भाव 800 रुपये क्विंटल तय किए थे। इससे कम भाव मिलने पर भाव के अंतर की राशि सरकार द्वारा किसानों के बैंक खाते में डालने का प्रविधान किया था।

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